Tuesday, June 30सत्यम खबर
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बिचार

नेपालगंज कय ऐतिहासिक बागेश्वरी मन्दिरमा शिव अऊर शक्ति

नेपालगंज कय ऐतिहासिक बागेश्वरी मन्दिरमा शिव अऊर शक्ति

आस्था, धार्मिक, प्रदेश ५, बिचार, शिक्षा/स्वास्थ्य, समाचार, समाज
विद्रोही २०७७ फागुन २७ गतेभगवान शिव अऊर पार्वती जी कय अदभूत युगल लीला कय बखान लाखन, करोडन वर्षन से होत आवा हय ।अपने पत्नी केरे सती हुई के मरेक वाद मईहाँ भगवान शिव मारे दुःख मा डुबि गए, इके वादि मईहाँ ऊ आपन जीवन लीला से हटि के घोर समाधी अवस्था मईहाँ चले गए । जब पुरय ब्रहमाण्ड केर अस्तित्व खतरा मईहाँ परि गवा, ऊ समाधी से जागि गए अऊर अपने प्रवाह नकरि के जगत कल्याण कय खातिर कालकूट हलाहल बिष अपने नटर्ई मईहाँ रोकी लिहिन अऊर ऊ हियाँ नीलकण्ठ बनि गए । सभन कय कल्याण करय वाले भगवान शिव खुदय दुःखी रहि गए अऊर सभन का सुख देतय रहें । दुष्ट तारकासुर अपने प्रभाव चारौ तरफ से बढाउतय हुए आगे बढय लाग फिरिका देव लोग अऊर मानव लोग शिव से प्रार्थना करय लागे अऊर उन से विनती करय लागे कि भगवान हम लोगन का तारकासुर राक्षस से रक्षा करओ अऊर ई सृष्टि का बचाय लेओ ईमा शिव जी के वरदान कय अनुसार नवजात शिशु शक्ति से ऊ के विन...
सितलचिनी एक जीवन बुटि : जादुको एउटा मात्र चमत्कारी रूख

सितलचिनी एक जीवन बुटि : जादुको एउटा मात्र चमत्कारी रूख

आस्था, प्रदेश ५, बिचार, शिक्षा/स्वास्थ्य, समाज
– हेमन्त राज काफले सितलचिनी, मधेसमा मुनगा वा सहजन र सितलचिनी, नामको वृक्ष चमत्कारी वनस्पतिको रुपमा पर्दछ । यो बिरुवा सबै प्राणीका लागी निकै उपयोगी छ । प्राचीन कालमा ऋषिमुनिहरुले यसलाई जीवन बुटिको रुपमा लिने गरेको धार्मिक ग्रन्थहरुमा पनि उल्लेख गरेको पाइन्छ । सितलचिनी अर्थात सितल चिनीका फूल, पात, फल लगायत सबै थोक जिवन उपयोगी हुन्छन् । यसलाई अग्रेजीमा मोरिङा ओलिफेरा भनिन्छ । सितल चिनी सन्सार भरी चमत्कारी बिरुवाको रुपमा लिने गरिन्छ ।निकै जिवन उपयोगी जडिबुटीको रुपमा मान्ने गरिन्छ र यसलाई बिदेशमा सब्चियुट अफ फुडको रुपमा मान्ने गरिन्छ । यसको क्याप्सुल अमेरिका, फ्रान्स क्यानेडा जस्ता देशमा निकै महँगो विक्री हुने गरेको पाइन्छ । यसको फलको तेलले कपाललाई फुट्न नदिने र सिल्की बनाउने गर्छ । यसको फलले पानी सुद्ध गराउन पनि प्रयोग गरिन्छ । यसको बोक्राले शरीरमा भएका विभिन्न एलेर्जीहरु जस्तै दाद लुतो आदि...
ब्यूटी टिप्सः सौन्दर्यता कय खातिर घरेलु नुस्खा

ब्यूटी टिप्सः सौन्दर्यता कय खातिर घरेलु नुस्खा

अवधी, आस्था, प्रदेश ५, बिचार
२०७७ फागुन २० गते – सन्ध्या शर्मा (चौबे) खाल अऊर त्वचा कय सुन्दरतम चमक लावयक अऊर खाल त्वचा सम्बन्धी समस्या से पिछा छोडवयक सब से अच्छा विश्वसनीय घरेलु सौन्दर्य उपायका माना जात हय ।सफल अऊर सुलभ अपनावय मईहाँ सहज अऊर कम समय मईहाँ तयार होयवाला घरेलु सौन्दर्य नुस्खा जिका हम सभय घर कय चौका रसोई घर से तयार कय सकेम बहुत सहज नुस्खा लुकान रहत हय । साथेन चेहरन कय खालन कईहाँ कउनव नुक्सान (साईड इफेक्ट) से भी हम सब कोई निरधक होई कय कउनव डेर भी नाई रहत हय । पाठक लोग अगर आप सभय आपन सुन्दरता कईहाँ लम्बा समय तक जवान ताजगी रक्खेक चाहा जावा जात हय तौ घरेलु नुस्खा आप हम सब लोगन के खातिर बरदान कय रुप होई सकत हय ।पाठक वर्ग खास कइके महिलन कय बारे मईहाँ ई नुस्खा कय जाद महत्व रहत हय । सौन्दर्य सम्बन्धी बातन कय काहे के महिला के सौन्दर्य श्रृंगार के बरदान मिला हय हर महिलन का १६ श्रृंगार कय अनुभव रहत हय ले...
मौत कय खेलौना

मौत कय खेलौना

अवधी, कला/साहित्य, प्रदेश ५, बिचार, समाज
फागुन १६ गते, आईतबारआज से लगभग ६१–६२ बरस पहिले कय ई बात होय जिका हम हियाँ एक लघु कहानी कय रुप मईहाँ प्रस्तुत करयक चाहित हँय ।विक्रम सम्वत २०१२–०१३ साल कय आस पास कय जेष्ठ–आषाद कय महिना होय । ऊ साल सायद सुखा परय तना भवा रहय । काफी लम्बे समय से पानी नाय गिरा रहय । चारऊ तरफ ताल–तलैया सब सूखि गए रहय । हमरे ई नेपालगंज कय रानी तलऊवा भी सूखि गवा रहय । हमरे साथे खेलैय वाले तमाम साथी रहय । जिन कय साथ हमहू लोग ईधर उधर खेलै चले जावा जात रहय । बाल काल कय साथी मईहाँ बदलू धोबी, अख्तर अली, सुरेश कुमार, बाबूलाल, फैयाज, नारायण गोपाल क्षेत्री, हैदर जईसे प्रमुख रहय । ई मईहाँ कुल हम जोली रहय तव कुछ हम लोगन से ३–४ बरस तक छोट रहय ।एक दिन कय बात होय हम अउर बदलू दूनौ जने अउर साथी लरिकेन कय साथ अपने घर कय पिछुवारे गड्हा मईहाँ खेलय गवा गा । ई गड्हा ऊ साल सुखाय गवा रहय । तब से आज तलक ई गड्हा पूरा कबहुँ सुखान नाई हय ।...
पुरान जमाने कय होली कय याद : होली कय हुडदंगी हमरे बाबा मोहनलाल वैश्य अउर हमरे बप्पा राम गोपाल

पुरान जमाने कय होली कय याद : होली कय हुडदंगी हमरे बाबा मोहनलाल वैश्य अउर हमरे बप्पा राम गोपाल

अवधी, आस्था, कला/साहित्य, प्रदेश ५, बिचार, समाज
फागुन १६ गते, आईतबारयहय चईत १६ गते हम आर्यन लोगन कय महान परव होली आवय वाला हय । होली कय बात होय अऊर हमरे बाबा स्व. मोहनलाल वैश्य अउर हमरे बप्पा स्व. रामगोपाल वैश्य कय जिकिर नहोय अईस तो होइन नाय सकत हय ।ई नेपालगंज नगरीया मईहाँ होली खेलय कय इतिहास बहुतय पुरान हय । ई नगर कय त्रिभुवन चऊक मईहाँ खेलय वाला होली तो देशै भरए मईहाँ प्रसिद्ध हय । पचासन साल पहिलय त्रिभुवन चऊक कय पच्छु तर्फ घी पिघलावै वाला बहुतय वडा लोहे कय कढाव रक्खा रहय । होली मईहाँ यही कढाव मईहाँ खुब गाढा लाल रंग घोरा जात रहय । ई रंगीन पानी मईहाँ होली खेलय वालेन कईहाँ बोर दिहा जात रहय । हियाँ धमार गावय वाले लोग जुटत रहेंय । होली कय गीतन से बसन्त कय ऋतु मईहाँ निखार आए जावा करत रहय । जईसन होली नकचियाय २ महिना पहिलेन से होली कय हुडदंगी लोग ठऊर ठऊर से लकडी चोराय के लावंय अऊर ऊ लकडी का होलिका जलावय वाले ठऊर मईहाँ जमा करतय जात रहय...
“आल्हा”

“आल्हा”

अवधी, प्रदेश ५, बिचार
आज से चालिस–पचास वर्ष पहिले अवधी समाज मइहाँ गंगा दशहरा से लइकै भादौं मासान्त तक पुरुष वर्ग वालक से लइकै वयस्यक तक के लोगन के बीच अखाडा मइहाँ कूदै औ कुश्ती लडै कय प्रतियोगिता होत रहय, डंड–वैठक, मग्दर भाँजै, लाठी चलावै, अखाडा कूदब जस कसरतै करैक चलन रहय । गाउँ– घर कय बिटिया– बहुरिया झलुवा – झूलत रहीं । यी अवसर मइहाँ झलुवा झूलैं वाली मेंहरुवै “कजरी” ‘सावन’ बारह मासा जस लोक गीत गवति रहीं अउर पुरुष वर्ग “वीरगाथा महाकाव्य” कय रचना ढोलक–मँजीरा के साथ सुनावत रहें । यी काव्य एकल एवं सामूहिक दूनौ तरह से क्षेत्र–क्षेत्र कय अनुसार गावैक चलन रहा । वर्षत मइहाँ कौनव व्यापार– धंधा होत नाय रहय, तब आदमी लोग खाली रहत रहँय वही समय मइहाँ का रहैं अतः सोमवार कय दिन भगवान शंकर कय ब्रत–पूजन–हवन, कीर्तन करत रहें अउर वाँकी दिनन मइहाँ एक्कठै होइकै आल्हा गावैं औ सुनैक खातिर वडा इच्छा करत रहँय । अव यी “आल्हा” वास...
बाँके जिला कय पत्रकारिता के पुर इतिहास

बाँके जिला कय पत्रकारिता के पुर इतिहास

अवधी, प्रदेश ५, बिचार, समाज
– ‘विद्रोही’ नेपाल कय पत्रकारिता कय जब जिकिर किहा जाई बाँके जिला कय नाम दुसर तिसर स्थान मईहाँ ई जरुर आवत हय । हिंया वि.सं. २०११ साल से पत्रकारिता कय निऊ डाला गवा रहय । वि.सं. २०११ साल मईहाँ स्व. महावीर प्रसाद गुप्ता कय साप्ताहिक नयाँ सन्देश पहिल पत्रिका निकलारहय । मूला ई पत्रिका सरकारी मान्यता से नाय निकला रहय । प्रज्ञा परिषद कय आर्थिक सहयोग मईहाँ भारत कय उत्तर प्रदेश कय राजधानी लखनऊ जऊन कि नेपालगंज से १९० किलोमिटर दुरी पर हय, हुँवा से ई पत्रिका छपी कय आवत रहय । ई पत्रिका १ वरस तक निकला बाद मईहाँ पईसा कय कभी कय कारण बन्द हुई गवा । इके बाद मईहाँ २०१२ साल मईहाँ बब्रुबाहन सिंह अऊर अनिरुद प्रसाद सिंह कय सम्पादन मईहाँ मंगल ज्योति नाम कय पत्रिका मुखपत्र मंगलप्रसाद माध्यमिक विद्यालय निकालिस । ई पत्रिका कय १ अंक सिरिफ प्रकाशित भवा । ईके ठिक ५ साल बाद २०१६ साल मईहाँ प० स्व. योगेश्वर प्रसाद मिश्र...
श्री गणेश चतुर्थि (सकट पूजा)

श्री गणेश चतुर्थि (सकट पूजा)

आस्था, प्रदेश ५, बिचार, समाज
हमरे अवधि समाज मइहाँ ई श्री गणेश चतुर्थि (सकट पूजा) कय वडा महत्व हय । महतारी अपने लरिकन के लम्बी उमिर सुख सुस्वाथ केर कामना अपने मन मइहाँ धइकय व्रत रहतहिंयैं । दिन भर पानी तक नाई पियत हिंयै । औ रात के चन्द्र दर्शन कै कय गणेश गौरी कै विधि से पूजा प्रार्थन करत हिंयै । माघ महिना के अंधेर पाख के चौथ के दिन ई पूजा होत हय । यी पूजा कय सामान अउर पूजा से अलगय होत हय । गन्जी औ कोहडा कइहाँ उबालत हय । तिल का धोय सुखवाय के भूजत हय अउर उमा भेली मिठाई मिलावत हय । कोई कोई तौ वही तिल कै भेली के चासनी मइहाँ लेड्डू बनावत हय । खाली तिल के नाई फूलमाला भूजके ऊ कय भी लड्डू बनत हय । जिके घर मइहाँ लरिका जन्म लिहे रहत हय उनके घर मइहाँ छागड बनावतहय । – शिव प्रसाद पाठक पूजा के दिन कय तैयारी वडा कठिन होत हय, पूरै घर दुवार अंगना कय सफाई कै कय लीप पोत करतहय । फिर व्रत रहँय वाली मिहरुवैं नहात हय अउर बार धोयके सफा ...
आत्मवोध

आत्मवोध

आस्था, बिचार
श्री मद्भागवद् गीता हिन्दू धर्म का सर्वोपरि ग्रन्थहै, और भगवान श्री कृष्ण के मुख से निकली हैऔर गीता का एक महत्व पूर्ण श्लोक है ।अनन्याश्चिन्तयन्तोमां ये जनाः उपासते ।तेषां नित्या भियुक्तानां, योग क्षेम वहाम्यहम ।। – आचार्य पं. विजय प्रकाश शर्मा ई श्लोक कय सार हय कि हे अर्जुन जउन भी मनुष्य हमार अनन्य भाव से चिन्तन करत हय उका खर्च हम दीत हय, गीता के परम उपासक श्री सन्त बामा थापा जी रहेें, उन अपने पूरै जीवन भर भगवान श्री कृष्ण कय अनन्य चिन्तन करत रहें । अउर उन कय माता जी भी भजन भाव मईहाँ लागी रहत रहीं बामा थापा जी गीता कय श्लोक पढते रहत रहें काहें से कि ऊई जानत रहें, कि हमरे घर कय खर्च तौ भगवान चलाइ हय मने एक दिन तो गजब हो भवा, उन कय महतारी कहिन पूत तू तौ कहत हौ कि भगवान गीता मईहा कहिन हय कि जो उन कय अनन्य भाव से चिन्तन करत हय उन के खर्च भगवान चलावत हय, मने पूत तु तौ भगवान के चिन्तन मइह...
प्रजातन्त्र कय पक्ष मईहाँ कलम चलावै वाले हमरे बप्पा–हमरे चच्चा

प्रजातन्त्र कय पक्ष मईहाँ कलम चलावै वाले हमरे बप्पा–हमरे चच्चा

प्रदेश ५, बिचार, समाज
बाँके जिला मईहाँ पत्रकारिता कय निउँ डालय वाले पहिल पत्रकार रहये हियाँ प० योगेश्वर प्रसाद मिश्र ‘वैद्य’ जी नेपालगंज मईहाँ ई सबसे पहिले मातृभूमि साप्ताहिक हिन्दी भाषा मईहाँ पत्रिका निकालीन । उनकय बाद मईहाँ हियाँ बहुताय पत्रकार आए प्रभात भण्डारी (सुरमा सरोवर साप्ताहिक), अईसेनय राधेश्याम शर्मा आदर्श मञ्ज, जितबहादुर बिसी पर्यवेक्षक साप्ताहिक, लियाकत अली संकल्प साप्ताहिक, गोपालबहादुर सिंह भेरी सन्देश, निर्भिक राजेन्द्र सिंह राठौर, प्रमानन्द मिश्रा प्रकाश साप्ताहिक । – ‘विद्रोही’ ई मेर हियाँ तमाम पत्रकार भए मूला प्रजातन्त्र कय पक्ष मईहाँ हमरे बप्पा राम गोपाल वैश्य अउर हमरे चच्चा ‘पन्नालाल गुप्ता’ आपन जिन्दगी भर कलम चलाईन । बप्पा राम गोपाल वैश्य पहिले लोकमत साप्ताहिक चलाईन ई पत्रिका कय सम्पादक बनाईन मणिलाल गुप्ता का बाद मईहाँ ऊ शंखनाद साप्ताहिक पत्रिका दर्ता कराईन अउर जिन्दगी भर चलाईन । दूसर...