Tuesday, June 30सत्यम खबर
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बिचार

मेंधरुवनका मारेक अउर छोडेक समस्या बढ्त जात हय

मेंधरुवनका मारेक अउर छोडेक समस्या बढ्त जात हय

प्रदेश ५, बिचार, शिक्षा/स्वास्थ्य, समाज
“विद्रोही” (२०७७ माघ १३)हिन्दु धर्म मईहाँ मेहरुवनका शक्ति कय एक रुप मान कय सम्मान दिहा गवा हय । मूला ई सब बात अब सिर्फ धार्मिक किताबन तक सीमित हय । व्योहारमा कबहुँ नाय लावा गवा हय । कुछ वर्षन से मेहरुवनका मारेक अउर बाद मईहाँ उनका छोडदेक समस्या बढ्तै गवा देखा गवा हय । ई प्रकार से देखव तव हियाँ बाँके जिला मईहाँ एक विशेष समुदायमा ई समस्या बहुतय हय । ई समुदाय के करीब १७ हजार से जादा मेहरुवय का उन के मर्दवय छोड् दिहिन हँय । जिके कारन अईसेन मेहरुवय मजदुरी करिके अपने पेट चलावत हँय । उन के लरिका बच्चा बहुत खराब स्थिति मईहाँ हँय । अबही तक मेहरुवनका या तो खाना बनावयक केर अउर बच्चा पईदा करैक मसिन जस प्रयोग किहाँ गवा हय । तस्वीरः गुगल अईसेन हालत सबहीँ समुदायमा हय । मेहरुवनका चद्दरमा लपेट दिहाँ गवा हय । ऊ घर से बाहेर नई निकल सकत हँय । हवा बयार भी उनका नाय लाग सकत हय । मौका परा तव उनका अपने भूँ...
यसरी खोलौं कृषिमा विदेशी लगानी

यसरी खोलौं कृषिमा विदेशी लगानी

बिचार
विदेशी लगानी बहसःसम्पादकीय नोटः सरकारले विदेशी लगानी तथा प्रविधि हस्तान्तरण ऐन २०७५ को अनुसूची संशोधन गर्दै कृषिमा विदेशी लगानी खोल्ने निर्णय गरेको छ । यो निर्णयमा केहीले विरोध जनाएका छन् भने कतिपयले समर्थन गरेका छन् । यसबारे हामीले सरोकारवाला पक्षहरू र स्वतन्त्र विज्ञहरूको विचार शृंखला सुरू गरेका छौं । मुराहरि पराजुली सरकारले कृषिका केही क्षेत्रमा सशर्त विदेशी लगानी खुला गर्ने निर्णय गरेपछि केहीले विरोध गर्न थालेका छन् । के यो विरोध जायज हो ? विदेशी लगानी भित्रिँदा हाम्रो कृषि, हाम्रा किसान र कृषि उद्यमी धराशयी हुन्छन् ? अनि हाम्रा उपभोक्ता नि ? हाम्रो कृषिका अनेकौं समस्याछन् । त्यसमध्ये एउटा अपर्याप्त पुँजी लगानी हो । कृषिको आधुनिकीकरण तथा बजारीकरणका लागि ठूलो लगानी आवश्यक हुन्छ । पर्याप्त लगानी नभएकैले हाम्रो कृषिको ठूलो हिस्सा निर्वाहमुखी रहँदै आएको छ ।सुरू गरौं, विरोध कसले गरिरह...
“रसोई मईहाँ अपनावय वाला कुछ सहज उपाय”

“रसोई मईहाँ अपनावय वाला कुछ सहज उपाय”

आस्था, प्रदेश ५, बिचार, शिक्षा/स्वास्थ्य, समाज
– सन्ध्या शर्मा (चौबे) २०७७ माघ १० गते“एक कहावत है दाना दाना पर लिखा है खाने वाला का नाम” घर मैंहा प्रयोग करैवाला सामाग्री से उपयोगी सामाग्री कै जानकारी, घरहिन से आप लोग पेट भरेय खातिर, खाना बनावैक एक छोट, सफा रसोई घर रहत है, रसोई घर कै हम लोग पूजा कइकै तब जउन है घर के भितर प्रवेश करा जात है । घर चलावैक सब महत्वपूर्ण योगदान रसोई घर कै रहत है । उसे सैगर जउन है रसोई चलावैवाली गृहणी रहत हिंयैं । रसोईक बिषयमा हम गृहणी लोग काम तऊ करा जात है । घरके हर सदस्यन कै जरुरत का पूरा कीन जात है । मने हम लोग प्रयोग होयवाला सामाग्री कै सही उपयोग करा जात है । कहूू हम लोग से अनावश्यक खर्च तव नाय होत है । ई सब बातन कय ध्यान अऊ जानकारी कय साथेन भोजन बनावैक समय मईहाँ ध्यान देयवाली जानकारिउ हय, अउर एक सामाग्री से दोसर काम मईहा प्रयोग कय सका जात है ।रसोई कय जानकारीः–(१) अगर आप बजार से सब्जी कय खरीददारी ...
बाल विवाह

बाल विवाह

आस्था, प्रदेश ५, बिचार, शिक्षा/स्वास्थ्य, समाज
– शिव प्रसाद पाठक २०७७ माघ ७ गतेविवाह कय बात सुनिकय चवकव नाय जउन विवाह कय बात हक बतावक चाहित हय तउन हमरे समाज कय दुर्दशा किहे हय । वह कय नाम हय बाल विवाह । जउन हमरे समाज मइहा“ पुरान चलन सब कोई कहत हय । आज से पचास वर्ष पहिले बाल विवाह से समाज मईहा“ कोई दुष्परिणाम नाई भवा रहय काहे की बारह–पन्द्रह वर्ष के उमेर मईहा“ बिटियन कय विवाह होत रहय । फिर पा“च या सात वर्ष कय बाद गवन होत रहय । साल दुई मईहा“ थवन होत रहय । तब तक बिटियन कय उमेर बीस–वाईस होय जात रहय । औ ऊ बिटिया सयान संज्ञान होई जात रहय ।चौबिस पच्चीस वर्ष मईहा“ सन्तान कय जन्म देय मईहा“ पुरा सक्षम होई जात रहय । बच्चा भी स्वस्थ पईदा होत रहय । स्वस्थ बच्चा होय से महतारी अउर बच्चा कय भर पेट दूध पियाय कय पालत रहय । जिसे लडिका बच्चा बीमार कम परत रहय । दुई तीन वर्ष तक बच्चा दूध पियत रहय तब तौ खेते खरिहाने मइहा“ तगडा काम होत रहय । ई सब बात आज सब...
शिख अउर हिन्दुन कय पवित्र जमीन उपेक्षा कय शिकार

शिख अउर हिन्दुन कय पवित्र जमीन उपेक्षा कय शिकार

धार्मिक, प्रदेश ५, बिचार, समाज
– ‘विद्रोही’ २०७७ माघ ७ गते बहुतय पुरान कर्णेल चिफ लोकबहादुर थापा कय बनवावा गवा लोक भक्तेश्वर महादेव कठमहल मन्दिर नेपालगंज उपमहानगरपालिका कय वार्ड नं. ७ मईहाँ बहुतय पुरान शिख अउर हिन्दुन कय पवित्र जमीन हय । ई जमीन हय श्रीचन्द्र भगवान कय कठमहल मन्दिर । हियां वर्षन पहिले सन १९३९ मईहाँ चिफ कर्णेल लोकबहादुर थापा यज्ञ करवाय कय कठमहल मन्दिर का वनवाईन रहयं । मन्दिर कय पुरब तरफ बहुतय सुन्दर भगवान श्रीचन्द्र कय मूर्ति रख्खा हय । पच्छु तरफ आज भी लकडी कय बना घर हय, हियां बाबा गंगादास धुनी रमाए कय बैठत हय । उत्तर पच्छु कय तरफ शिख्खन कय पहिल गुरु, गुरु नानक देव जी कय चरण पादुका रख्खा हय । बीच मईयाँ गाय कय मुर्ति पुरब मुहं किहें रख्खा हय । जहाँ गईया कय मुर्ति हय ई के बगलय मईहाँ पुरबय तरफ भगवान श्रीचन्द्र अउर भगवान शिव कय मन्दिर बना हय । ई इमेर से कर्णेल लोकबहादुर थापा साहेब बहुतय कारिगरी...
खिचरी

खिचरी

आस्था, प्रदेश ५, बिचार, समाज
हमरे अवधी समाज मईहाँ माघ महिना के संक्रान्ति कइहाँ खिचरी के त्योहार के रुप मइहाँ मनावा जात हय । खिचरी काहे नाउ परा हय ईमा भी एक कारन है । यदि दिन मइहाँ सकारेन नहाय धोय के खिचरी छुवा (पुन्य) कीन जात है जिहमा चाउर मइहाँ उर्द कय दाल गबडा रहत हय वही खिचरी के सीधा मइहाँ नोन,मिर्चा आलु घियू गोभी यी सब सामान कईहाँ छुई के पण्डित ब्रम्ह्ण कइहाँ दान कीन जात हय । यी दिन के भोजन मइहाँ भी खिचरी खावा जात हय । खिचरी माने चाउर मइहाँ उर्द दाल गवडा गील, गील भात कइहाँ खिचरी कहत हँय । वहीमा आदी नोन परा रहत हय । खाय के समय खुब घिउ डारत हँय । साथेन आलू केर भरता आलु केर कचालु पापड ई सब दुपहारे केर भोजन होय ई सब चीज खायक कारन ई हय कि जाडेम जउन हमरे देही केर चिकनाई खतम होई जात हय । शरीर मइहाँ फिर से नवा ताकत देयके खातिर घिउ आदी, पापड आलु खावा जात हय । जिहसे जउन शरीर मइहाँ शक्ति कम होय जात हय ऊ पुरा होय जाय । – ...
अवधी भाषा एवम् संस्कृति

अवधी भाषा एवम् संस्कृति

प्रदेश ५, बिचार
पुराकाल मइहाँ ‘कोशल’ नाम कय एक बहुत बडा जनपद रहय । आज ‘देश’ कहयक जइसे ‘जनपद’ कहा जात रहय । गौतम बुद्ध कय जनम से बहुत पहिले इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्री राजा लोग यी जनपद कय स्थापना किहिन रहय । उत्तर भारत कय यी जनपद कय सीमा मगध अउर पश्चिमी सीमा कुरु जनपद का छुवत रहय । उत्तर मईहाँ नेपाल कय तराई से लइकय दक्षिण मइहाँ गंगा नदी तक इकय विस्तार आवश्य रहय । अवध कय वर्तमान भाग यी जनपद कय केन्द्रीय भाग रहय । यही कोशल साम्राज्य कय एक भाषा रहय जिका कोसली प्रकृत कहब ठीक रही । कोशल एक सुखी अउर सम्पन्न जनपद रहय यही कारण यी कय भाषा भी खूब फली–फुली रहय । विभिन्न विद्वानन कय मत हय कि यी भाषा लगभग १५–१६ सौं बरस तक प्रमुख सम्पर्क भाषा कय रुप मा रही । – बिष्णु लाल कुमाल कोशल मइहाँ जौन इक्ष्वाकु वंशीय आर्य आइके बस गे रहय । विद्वान उनका नब्य आर्य कहत हय काहे की उ लोग स्थानीय लोगन से एक दम घुल मिल गये रहय । यी लोग...
अवधी भाषा केर पैदाईस अउर आज केर अवस्था

अवधी भाषा केर पैदाईस अउर आज केर अवस्था

आस्था, प्रदेश ५, बिचार, समाज
अवधी भाषा एक हजार साल पहिले पईदा हुआ रहय । ई भाषा हियां गोरखाली (नेपाल) मा ८ लाख लोग बोलत हंए । हुंवा अंगरेजी (भारत) मा ७ करोड लोग ई भाषा बोलत हंए । अइसे हुंआ अंगरेजी तरफ (भारत तर्फ) अवधी भाषीन केर जनसंख्या ७ करोड जत्ता हए । १ हजार साल पहिले अवध केर जमीन मा ई भाषा पइदा हुआ । ई भाषा अवध क्षेत्र केर २४ जिला मा बोला जात रहए । अवध केर पुरान नाम कौशलपुरी रहए ई केर अउर तमाम नाम हय साकेत, अयोध्या, अजुध्या, दक्षिण कौशल, भद्राकौशल ई का कौशली भी कहा जात रहए । बधेलखण्ड छत्तीसगढी अउर बुंदेली मा भी ई भाषा बोला जात रहए । – ‘विद्रोही’ मुगलकाल मा १२ ठव प्रान्त रहा उन मा मगध भी एक प्रान्त रहए । मध्यकाल मा उत्तर कौशल केर राजधानी श्रावस्ती रहए । मध्य मा साकेत अउर अयोध्या भी रहए तीसर रहए कौशल अउर महाकौशल ई प्रकार अवध क्षेत्र बहुत बडा रहए । अवधी भाषा बधेली–बधेल, छत्तीसगढी, बुन्देली अउर भोजपुरी भाषा मा भी...
बडा महाराजाधिराज स्व. श्री ५ पृथ्वी नारायण शाह सरकारको महावाणी तथा नेपाल एकिकरण अभियानको स्मरण

बडा महाराजाधिराज स्व. श्री ५ पृथ्वी नारायण शाह सरकारको महावाणी तथा नेपाल एकिकरण अभियानको स्मरण

आस्था, प्रदेश ५, बिचार
सन्दर्भ २९९ औं : पृथ्वी जयन्ती तथा राष्ट्रिय एकता दिवसटुक्रिएर रहेको बाइसे चौबिसे राज्यलाई एकिकरण गरी विशाल नेपाल राष्ट्रको निर्माण बडा महाराजाधिकार स्व. श्री ५ पृथ्वी नारायण शाहले गर्नु भएकोले नेपाली जनताको हृदयमा आजसम्म मौसुफ सरकारप्रति श्रद्धाभक्ति छ । ‘विद्रोही’ अहिले देश विषम परिस्थीतीबाट गुज्री रहेकोले नेपाली जनता स्व. श्री ५ बडा मराजाधिकार पृथ्वीनारायण शाहले नेपाल राष्ट्रको निर्माणमा पु¥याएको योगदानको पुनः १ पटक स्मरण गर्न थालेका छन् । यो कुरा यथार्थ सत्य हो कि यो देश कुनै राजनीतिक दलको राजनेता ले बनाएका हौइनन बरु देश लाई बनाउन शाह वंशीय राजाहरुको देन छ । यहाँ शाहवंशीय राजाले देश र जनताको हक हितमा काम गर्नु भएकोले हिमालयको काखमा हामी नेपाली जनता शान्तिपूर्ण ढंगले बस्न पाएका छौं । यस बीच केही राजनेताहरु यस्ता छन्, जुन कि देशलाई आफ्नो बिर्ता जस्तो ठान्दै यहाँ विदेशीको चलखेल गराई...
‘संसदको हत्या गर्ने’ ओलीबाट चुनाव असम्भव

‘संसदको हत्या गर्ने’ ओलीबाट चुनाव असम्भव

बिचार
नेपालको इतिहासमा वीपी कोइराला प्रथम जननिर्वाचित प्रधानमन्त्री हुन् जसलाई तत्कालिन राजा महेन्द्रले ‘कू’ गरी सत्तबाट हटाएर जेलमा राखे । निरंकुश शासनको ३० वर्षे कालरात्री शुरु गर्न महेन्द्रले दुई तिहाईको निर्वाचित सरकारमाथि कू गरेका थिए । २०१७ सालको पौष १ गतेको घटनाले नेपाली राजनीतिमा हुक्के, बैठके र चाटुकदारहरु हावी भए । जनताबाट निर्वाचित भएकाहरु जेल हालिए । ३० वर्ष निरंकुश निर्दलीय शासन चल्यो । बाबुराजा चित्रकार आर्थिक, सामाजिक र राजनीतिक प्रगतिमा ठुलो बाधा आयो । नेपाली जनताले निरंकुश शासन ढाल्न ठुलो संघर्ष गर्नुप¥यो । २०४६ सालको जनआन्दोलनले देशमा बहुदलीय व्यवस्थाको शुभारम्भ भयो ।२०४६ सालको परिवर्तनपछि २०४८ सालमा आमनिर्वाचन भयो । गिरिजाप्रसाद कोइरालाको नेतृत्वमा बहुमतको सरकार गठन भयो । तर, नेपाली काँग्रेसको आन्तरिक विवादले कोइरालाले मध्यावधि चुनाव घोषणा गरे । काँग्रेसभित्र विवाद चर्क...