
बाँके जिला मईहाँ पत्रकारिता कय निउँ डालय वाले पहिल पत्रकार रहये हियाँ प० योगेश्वर प्रसाद मिश्र ‘वैद्य’ जी नेपालगंज मईहाँ ई सबसे पहिले मातृभूमि साप्ताहिक हिन्दी भाषा मईहाँ पत्रिका निकालीन । उनकय बाद मईहाँ हियाँ बहुताय पत्रकार आए प्रभात भण्डारी (सुरमा सरोवर साप्ताहिक), अईसेनय राधेश्याम शर्मा आदर्श मञ्ज, जितबहादुर बिसी पर्यवेक्षक साप्ताहिक, लियाकत अली संकल्प साप्ताहिक, गोपालबहादुर सिंह भेरी सन्देश, निर्भिक राजेन्द्र सिंह राठौर, प्रमानन्द मिश्रा प्रकाश साप्ताहिक ।
ई मेर हियाँ तमाम पत्रकार भए मूला प्रजातन्त्र कय पक्ष मईहाँ हमरे बप्पा राम गोपाल वैश्य अउर हमरे चच्चा ‘पन्नालाल गुप्ता’ आपन जिन्दगी भर कलम चलाईन । बप्पा राम गोपाल वैश्य पहिले लोकमत साप्ताहिक चलाईन ई पत्रिका कय सम्पादक बनाईन मणिलाल गुप्ता का बाद मईहाँ ऊ शंखनाद साप्ताहिक पत्रिका दर्ता कराईन अउर जिन्दगी भर चलाईन । दूसर तरफ ‘चच्चा’ पन्नालाल गुप्ता कय पहिलेन से किरण साप्ताहिक चलत रहय । ई दूनौ पत्रिका जब बजरीया मईहाँ निकलय तौ हियाँ कय मनई बडे चाव से ई का पढ्त रहय । शंखनाद साप्ताहिकमा एक स्तम्भ निकलवाईन अजीत कुमार सिंह जी ऊ कय नाम रहय त्रिभुवन चऊक बोलत हय । व्य·य मईहाँ निकलय वाला ई स्तम्भ विश्व कोष कय नाम से निकाला गवा । ऊ समय मईहाँ शंखनाद साप्ताहिक मईहाँ अजित कुमार सिंह, विनोद चिन्तक जईसन लेखक खूब लिखिन ।
त्रिभुवन चऊक स्तम्भ कईहाँ आगे बढावेक काम किहिन हमरे बप्पय । जबतक ऊ जिन्दा रहय त्रिभुवन चऊक बोलत रहय लिखतय रहये । ई बडा शौभाग्य कय बात हय कि किरण होय चाहे शंखनाद ई दूनौ पत्रिका मईहाँ हमका लिखेक मऊका मिला पहिले किरण मईहाँ लिखेन बाद मईहाँ अपने बप्पा कय पत्रिका शंखनाद मईहाँ लिखये लागेन । ई मारे हमका पत्रिका मईहाँ लिखय कय शिक्षा विरासत मईहाँ मिला । हमार एक काका हँय भरत किशोर गुप्ता । ऊ भारत कय मुज्जफरपुर से विमल वाणी पत्रिका निकलत रहय । अब ऊ हियाँ नेपालगंज से दैनिक खबरी निकालत हय । ई मेर हमार पुरा परिवरिवय पत्रिका कय क्षेत्र से जुडा रहा । ई चीज कय फाईदा हमका जरुर मिला । मूला राम गोपाल वैश्य अउर पन्नालाल गुप्ता से आज तक केहु भी पत्रकार से तुलना नाय किहा जाय सकत हय । न जाने कऊन माटी से बने रहय ई दूनौ । एक किसिम से देखा जाय तौ ई दूनौ पत्रकारै मिसन पत्रकारिता कय शुरुवात किहिन ।
पत्रिका का व्यावसायिक तर्फ कबहुँ नाय जोडीन कोई पैसा देय तो ऊ का आपन पत्रिका पढेक देत रहय । जो नाय देय वहुका आपन पत्रिका पढयक जरुर देत रहय । चच्चा पन्नालाल गुप्ता तो अबही दुई अढाई बरस पहिले साईकल मईहाँ पत्रिका बांटत देखा जात रहय । बप्पा राम गोपाल वैश्य तो अपने पएन्ट के जेबय मईहाँ तमाम पत्रिका ठुंसे रहत रहय अऊर सब ठऊवा मईहाँ बांटत चलत रहय । उनी कय कुछ पुरनिया दोस्त लोग बतावत हँय, रामगोपाल जी पंचायत काल कय समय मईहाँ खुब समाचार, लेख छापिन, ईस्से पंचायत कय हिमाईतियन कय निंद ऊडी गवा । ई समय मईहाँ ऊ समय आज कय जिल्ला प्रशासन मईहाँ बैईठय वाले बडा हाकिम ऊनका बोलाए कय कहिस वैश्य जी पंचायत कय विरोध करैक छोड देव तब तुमका बहुतय रकम देब ।
तुमका बहुतय बडा घर बनवाय देव, ऊ समय बप्पा रामगोपाल बडा हाकिम कय जबाव देतय कहिन पत्रिका हम शऊक मईहाँ चलाईत हय व्यापार कय जरिया नाय बनाएहन । हम आपन ईमान नाय बेचित हन । जनता अऊर देश कय खातिर ई का चलाईत हय, हमका गरीबी पसन्द हय पर बेइमानी पसन्द नाय हय, ई कहिके ऊ हुवा से चले आए । जब पत्रिका निकलय लागतो लाल मसी लगाए के तमाम शब्द निकालेक कहा जात रहय । कतनय बार जबरजस्ती पत्रिका निकालिन तब ऊनका बन्द किहा गवा । ऊ जमाना मईहाँ ई पत्रिका लेटर प्रेस मईहाँ छपत रहय । बप्पा तब आपन प्रेस महालक्ष्मी छापाखाना लगवाए लिहिन रहय । हियाँ तमाम नऊकर चाकर काम करत रहय । ऊधर (चच्चा) पन्नालाल गुप्ता जी भी सरस्वती प्रिन्टि· प्रेस लगवाईन ऊ प्रेस मईहाँ चच्चा आपन पत्रिका कईहाँ कम्पोज खुदय करत रहय ।
बडा मसक्कत कईकय दिन रहय ऊ आँखी फोरी–फोरी कय एक–एक अक्षर छ दिन तक जोरत रहय, सातवे दिन पत्रिका निकल पावत रहय । ऊ का साईकल मईहाँ धरिकय खुदय बांटय निकल परत रहय । चच्चा पन्नालाल जी भी प्रजातन्त्र कय पक्ष मईहाँ खुब कलम चलाईन नजाने कतनी बार ऊ जेल गए । ई कय गिनती भी नाय किहा जाय सकत हय । २०४६ साल मईहाँ भवा प्रजातन्त्र कय आन्दोलन मईहाँ चच्चा जी का जंगल मईहाँ पुलिस वाले छोडी कय आईगय गिरत परत ऊ नेपालगंज मईहाँ पहुँचे रहें । यही समय मईहाँ निर्दलीय अउर बहुदलिय बीच चुनाव भवा, ई चुनाव मईहाँ हमरे बप्पा बहुदलिय कय पक्ष मईहाँ आवाज उठाईन, आपन घरमा निला झण्डा लगाईन अउर बहुदलिय कय पक्ष मईहाँ लाग गये । बात मईहाँ ऊ राष्ट्र पंचायत कय सदस्य चुनाव मईहाँ उम्मेदवार भी भए । मूला हारिगे अऊर मण्डले कय विरोध मईहाँ काम करतय रहें ।
ई मा पञ्चायत कय हिमायतीन मण्डले केरन कय विरोध मईहाँ बप्पा रामगोपाल लिखय भी लागे तो ऊ मण्डले लोग उनीका उठाय कय बाँके कय महेन्द्र नगर मईहाँ लई जाएकय बन्द किहिन । उनी कय मुह पर करिखा पोतिन । हात जोडवए कय फोटु खिचिन जनता जब उनीकय समर्थन मईहाँ उतीरयाए तब उनका महेन्द्र नगर से ऊ लोग छोडिन । बप्पा कय पत्रिका मईहाँ हम काम करित रहेन । पर हम पइसा उठावेक अऊर जादा ध्यान देत रहेन । गुलरिया, राजापुर, सत्ती, महेन्द्रनगर, धनगढी जइसन ठऊवा तक पत्रिका कय पईसा उठावेक पहुँच जाइत रहय । मन लाग तब पत्रिका मईहाँ काम किहेन नाय मन लगा तो मटर गस्ती मा दिन गुजार देत रहेन । ई बात से बप्पा हमरे ऊपर बहुत गुस्सा रहत रहे । एक बेरिया बप्पा कहिन अजय आज फलाने ठऊर मईहाँ जाई कय समाचार संकलन करकय लाव, ई काम तुरुन्तय करऔ । पर हम हुँवा नाय गेन फिर का बप्पा लाल पीला हुई गए गुस्सा मईहाँ कहिन आज से हम तुम्का अपने पत्रिका से निकालित हन अब हियाँ काम करय न आएयव हमहुँ ठहरेन अपने बाप कय लरिका । महीनौं तक काम पत्रिका मईहाँ नाई करैय गएन ।
कतनौ बार बप्पा काम करेक बोलाईन पर नाय गएन । बप्पा आखिर हम का अपने हुँवा से भगाईन कइसे ? ई बात उनके अपने गांठ मईहाँ बांध लिहेन । ऊ समय मा हम शिव सेना से जुड गए रहेन । शिवसैनिक लोग ई मांग करय लागे कि जईसे हिन्दुन कय पक्ष मईहाँ हुवा भारत कय महाराष्ट्र राज्य मईहाँ हिन्दु हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे सामना नाम कय पत्रिका हुँआ निकालत हय वही मेर कय सामना हियाँ नेपालगंज से भी निकलेक चांही । ई मांग ई मारे शिव सैनिक उठाईन कि हियाँ नेपालगंज से मोहम्मद हारुन हल्वाई एक पत्रिका निकालत रहें । ऊ पत्रिका हियाँ बहुतय चर्चा मईहाँ रहय । नशेमन साप्ताहिक पत्रिका कय जईसन लावेक खातिर सामना पत्रिका का निकालेक मांग हियाँ उठा । ई पत्रिका निकालेक जिम्मेवारी दिहा गवा हमका, फिर का हम भाग गएन महाराष्ट्र मईहाँ हुवाँ कईसेन सामना निकलत हय अऊर उहाँ से आएन सामना कय रुपरेखा तयार करिकय पर घुसी गएन हियाँ लक्ष्मी फिलिम हल मईहाँ गुलाम ए मुस्तफा फिलिम देखय । फिलिम मईहाँ नाना पाटेकर कय भूमिका अतना अच्छा लाग कि जिल्ला प्रशासन कार्यालय मईहाँ जाएकय पत्रिका कय नाम शेर–ए–सामना रखी कय आई गएन ।
ई बात पर शिवसैनिक हमरे ऊप्पर बहुतय बिगड गए अऊर कहय लागे पत्रिका कय नाम सुधारओ मूला सिफारिस पहुँच गवा रहय काठमाण्डु प्रेस सूचना विभाग मईहाँ फिर हम काठमाण्डु जाईकय हुवाँ आज के सामना पत्रिका दर्ता कराय के आऐगेन । पत्रिका दर्ता कराय लिहेन तो बप्पा खुबै हँ सय लागे । हम पुछेन कि हंसत काहे हव तो ऊ कहिन पत्रिका दर्ता कराय के का होत हय । तुमका सही ढंग से लिखेक तो आवत नाही हय । को पढी तुम्हार पत्रिका का ? फिर हमका ऊन कय उप्पर गुस्सा लागिगा । बप्पा हमका चुनौति देत हय ई बात हम जानेन, फिर का २०५५ साल आषाढ २४ गते जउन दिन सांसद मिर्जा दिलसाद बेग कय काठमाण्डु मईहाँ हत्या भवा वही दिन पहिला अंक आज के सामना पत्रिका निकालेन ऊ मा एक स्वास्थ्य संगठन कय समाचार छापे रहेन ।
ऊ समाचार पढा गवा फिर फोटु कपी ऊ कय खुबय बिका, ई कय बाद मईहाँ सामना नाय रुका सामना सब कय मुकाबला करतय आगे बढतय रहा । ई पत्रिका आज तक निकलतय आवा हय । सामना नियमित रुपसे निकलत हय पर बप्पा कय पत्रिका शंखनाद अवही बन्द हय बडा अफशोस कय बात हय बप्पा कय गुजरेक दिन से बन्द हुई गवा । ई पत्रिका अबही तक नाय निकाल पाए हन् । पर खुशी ई बात कय हय कि पत्रकारिता कय क्षेत्र मईहाँ हमरे बप्पा अऊर चच्चा जईसन योगदान दिहिन ऊमेर ऊन दूनौ लोगन कय सम्मान भी मिला हय । दुनौ जना प्रेस स्वतन्त्रता सेनानी से सम्मान पाईन हय । राम गोपाल वैश्य कय याद राखय कय खातिर प्रेस स्वतन्त्रता सेनानी स्व. श्री रामगोपाल वैश्य स्मृति प्रतिष्ठान बनिकय सामाजिक सेवा कय काम करी रहा हय । ई प्रतिष्ठान का अपने परिवार तक सीमित नाई रक्खा गवा हय । ई प्रतिष्ठान कय अध्यक्ष नन्दलाल वैश्य हय अईसेन ‘चच्चा’ पन्नालाल गुप्ताका याद राखय कय खातिर प्रेस स्वतन्त्रता सेनानी पन्नालाल गुप्ता प्रतिष्ठान भी बन गवा हय ।
ई प्रतिष्ठान कय अध्यक्ष हय उनके बडे लडिका विजय कुमार गुप्ता । ई मेर हक कय खातिर आपन पुरा जीवन कलम चलावय वाले ई दुनौ पत्रकार कईहाँ याद राखय कय खातिर हियाँ बहुत बडा प्रयास किहा गवा हय । राम गोपाल वैश्य कय बईसे तो बडे जमिन्दार मईहाँ नाम आवत हय, पहिले कय बेलभार पञ्चायत कय कालिकापुर मौजा बकोटिया गाँव वार्ड नं. ५ मईहाँ १६ विगाहा (पक्का) जमीन उनी कय रहय । ई जमीन बहुत लोग कब्जा करीकय अपने नाम मईहाँ नापी कराय कय लालपुर्जा निकालिकय भोग चलन करत आए रहे हय । बर्दिया कय राजापुर बजार मईहाँ उनी कय जनम भवा ऊ घर हुवा आज भी हय । राजापुर नगरपालिका बर्दिया प्रेस स्वतन्त्रता सेनानी रामगोपाल वैश्य कय ऊ घर कईहाँ गिराय के सडक चौडा करेक चाहत हय । ई घर बचावेक प्रयास चल रहा हय । ऊ धनी बहुत रहे पर पत्रकारिता क्षेत्र मईहाँ अईस लागे कि आपन जमीन तक नाय बचाय पाईन । जब बहुत गरीबी मईहाँ रहय ।
आज कय वार्ड नं. ७ गगनगंज टोल मईहाँ जऊन घर रहय ऊ भी फुस कय बना रहय । गरीबी अतना रहय कि पैसा कय कमी कय खातिर ऊ नेपालगंज टांगा स्टैण्ड मईहाँ घोडा कय खाय वाला दाल खरीद कय लावत रहय बिन छिन कय सफा करीकय ऊ दाल खात रहय । ई मेर सडा दाल मोटीहा चाऊर खाएकय आपन दिन गुजारीन । हियाँ कहयक जरुरी हय कि राम गोपाल जी कय घडेरीन रहँय शिव देवी वैश्य अऊर हमरे चच्चा पन्नालाल जी कय घडेरीन रहँय कमला देवी गुप्ता । मर्दवा जब बन्द हुई जात रहय तबहुँ भी तनकौ नाई घबरात रहीं । दिन भर घर कय काम करत रहीं पर अपने मर्दवन कईहाँ पत्रकारिता छोड देव ई दबाव कबहुँ नाई दिहिन । हमरे चच्चा पन्नालाल जी कट्टर काँग्रेसी विचारधारा कय रहय । अऊर हमरे बप्पा कट्टर मधेशवादी विचारधारा कय रहे । ऊ दूनौ कय एक आपस मईहाँ कबहुँ विचार नाई मिलत रहय । पर दूनौ जना साथेन देखे जात रहे । रामगोपाल जी सद्भावना पार्टी से जुडे रहें ।
बाँके जिल्ला अऊर बर्दिया जिल्ला मईहाँ उनही सद्भावना पार्टी कईहाँ स्थापित किहिन । सद्भावना पार्टी से विचार जब नाई मिला तौ पार्टीले अलग हुईगए अऊर फिर कउनौ पार्टी से नाई जुडे । तत्कालिन नेकपा एमाले उनकय पत्रकारिता कय क्षेत्र मईहाँ काम करयक खातिर उन का प्रेस स्वतन्त्रता सेनानी घोषणा करावय के खातिर मुख्य पहल किहिस । ई मेर व्यक्ति दुनियाँ मईहाँ कमै पईदा होत हय । आजी पत्रकार तो हियाँ बहुत हुए पर सभै पईसा कमाय कय दऊड मईहाँ हय । उन जईसे कय पास पईसा तो बहुत हय, पर जईस बप्पा रामगोपाल वैश्य अऊर चच्चा पन्नालाल गुप्ता कय जईसे नेपालगंज केर नागरिक सम्मान दिहिन ऊ सम्मान आदर शायद कऊनौ पत्रकार कबहुँ नाय पाए सकत हय, अईस लागत हय । (स्रो. समाज जागरण साप्ताहिक)












