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अवधी भाषा केर पैदाईस अउर आज केर अवस्था

अवधी भाषा एक हजार साल पहिले पईदा हुआ रहय । ई भाषा हियां गोरखाली (नेपाल) मा ८ लाख लोग बोलत हंए । हुंवा अंगरेजी (भारत) मा ७ करोड लोग ई भाषा बोलत हंए । अइसे हुंआ अंगरेजी तरफ (भारत तर्फ) अवधी भाषीन केर जनसंख्या ७ करोड जत्ता हए । १ हजार साल पहिले अवध केर जमीन मा ई भाषा पइदा हुआ । ई भाषा अवध क्षेत्र केर २४ जिला मा बोला जात रहए । अवध केर पुरान नाम कौशलपुरी रहए ई केर अउर तमाम नाम हय साकेत, अयोध्या, अजुध्या, दक्षिण कौशल, भद्राकौशल ई का कौशली भी कहा जात रहए । बधेलखण्ड छत्तीसगढी अउर बुंदेली मा भी ई भाषा बोला जात रहए ।


मुगलकाल मा १२ ठव प्रान्त रहा उन मा मगध भी एक प्रान्त रहए । मध्यकाल मा उत्तर कौशल केर राजधानी श्रावस्ती रहए । मध्य मा साकेत अउर अयोध्या भी रहए तीसर रहए कौशल अउर महाकौशल ई प्रकार अवध क्षेत्र बहुत बडा रहए । अवधी भाषा बधेली–बधेल, छत्तीसगढी, बुन्देली अउर भोजपुरी भाषा मा भी हय ।
बिहार मा मैथिली, भाषा मा अटावा हय । ई भाषा मुजफ्फरपुर, दरभंगा जईसन ठउर मा बोला जात हय । हिया गोरखाली (नेपाल) मा जनकपुरी मा मैथिली भाषा से जोडी के बोला जात हय ।
अवधी केर पैदाईस शौरसैनी मथुरा नगरी कय दाहे् मा भवा । अर्धमगधी भाषा गया के ठउर मा भवा । अवधी भाषा केर तमाम भेस हय । तमाम ठउर मा रुपान्तरित करके बोला जात हय । सारापान केर दोहा कोष मा ई हय गोरखनाथ बाबा केर सम्प्रदाय मा अवधी भाषा घुसा हय ।
९ शताब्दी मा पाकृत पैग्लम, राउल्वेल (११ शती) मा दामोदर पण्डित केर कृति केर ग्रन्थ म संस्कृत भाषा केर साथ अवधी भाषा घुसके ई ग्रन्थ के बारे मा समझाईस हय । १२ शती मा कुबलाय माल, जइसे प्राचीन ग्रन्थ मा आपन उपस्थिती देखाईस हय अवधी भाषा । पूर्वी अवधी हुंवा अंगरेजी (भारत) मा सुलतानपुर, फइजावाद, बढनी, गोण्डा जईसे ठउर मा बोला जात हय । कौशल, बंधेली, छत्तीसगढी, पश्चिमी अवधी अउर गाञ्जरीमा बोला जात हय । ई ठउर के सीतापुर के इरदगिरद के लखीमपुर तक ई अवधी भाषा बोला जात हय । रायबरेली, उन्नाव, बैसवरा मा भी अवधी भाषा बोला जात हय । सन १८५७ मा बैसवारी स्वतन्त्र जिला रहय वाद मा बैसवारी का तोड के २ जिला बना । गोश्वामी तुलसीदास रामचरित मानस बैसवारी अवधी भाषा मा लिखिन
रहंय । अवधी भाषा मा तमाम काव्य ग्रन्थ लिखा गवा, ई मा सप्तकाव्य, सुफीकाव्य, नीतिकाव्य, व्य·य–विनोद काव्य, संतकाव्य, रामकाव्य, कृष्णकाव्य, वीरकाव्य, जइसन रचना किया गवा । सुफीकाव्य– मुल्ला दाउद, मंझन कवि, मलिक मुहम्मद जायसी, हंस जवाहर, युसुफ जुलेखा, शेष निसार, सुफी जान, चरनदास, दादु दयाल, हरिदास, गरीबदास, तुलसीदास, हाथरस, परसुराम चर्तुवेदी, जईसन कवि लोग लिख केर अवधी भाषा का पढावेक केर काम किहिन । संतकाव्य धारा मा वीरु साहेब, यारी साहेब, सूफी साहेब, केशवदास, गुलाल साहेब, भीखा साहेब, मुल्ला साहेब, मनुदास, जगजीवनदास, दोलनदास, धरणीदास, हरिया साहेब, शिवनारायण, मधुरदास, अनन्तदास, रैदास, जईसन कवि लोग लिखीन । ईश्वरदास, किन्नाराम, रामस्वरुप, नेवलदास, बोधेदास, किशोरदास जईसन लोग
लिखीन । अघोरपंथी साधक लोक भी अवधी भाषा का आगे बढावेक खातिर सधुक्कणी भाषा मा अनगिनत किताब लिखिन । इनमा पहलवान दास, रामलग्नानंद के नाम आवत हय ।
हिन्दुकाव्य केर कवि जटमल पुष्कर, सूरदास लखनवी, मूरलीदास, रामदास, रतन नारायण, राजाचित्र (मुकुट) शिवराम, सलोनी, भवानी शंकर, चर्तुभुर्ज, सेवराम, नरपति व्यास, मुकुन्द सिंह, भवानी शंकर, जईसन कवि आपन दोहा चौपाई से अवधी भाषा का आगे बढावेक काम किहिन । गोश्वामी तुलसीदास, रामकाव्य, ईश्वरदास, सवसे पुराना प्राचीन कथा स्वर्गारोहणी कथा, विष्णुदास रामायण अईसनै पुरुषोत्तम, नामादास, लालदास, बाल अली, प्राणचन्द चौहान, जानकी शरण, रामप्रिया शरण, सहजराम, प्रयागदास, रामसखे, सरजु पण्डित, रामचरण दास, मधुसूदनदास, कृपा निवास, राजा विश्वनाथ, रुद्रप्रताप सिंह, किशोरीशरण, जानकीशरण, बनादास के तमाम किताब लिखा हुवा पढा जात हय ।


रसिकोपासना कवि ललकदास, रामशरण, नवल सिंह, रामगुलाम, रधुनाथदास, युगलनन्द शरण, हेमलता, जीवाराम, रामसनेही, पतितदास, माधवदास, शीलामणि, नरहरिदास, माधव सिंह, जानकी प्रसाद, बैजनाथ, रुपकला, काष्ठ जिहवा स्वामी, सीताप्रसाद, बदलुदास, हनुमान शरण, शितला सिंह ‘गहरवार’, देवनारायण रामप्रिया, रामबल्लभ शरण, सियाचरण, सीताराम दास, केर लिखा हुवा तमाम किताब हय ।
स्कृत भाषा से अवधी भाषा मा करीके स्वामी रामानन्द तमामन किताब लिखिन हनुमान चालिसा इन्ही केर लिखा हुवा पाठ हय । कृष्णा काव्य भी तमाम लिखा गवा, कृष्ण केर भक्ति मा ब्रज भाषा मा जादा किताब लिखा हुवा मिलत
हय । पर अवधी मा एक लिखा गा हय, कवि लक्षदास, विनोद सागर, ललक दास, मंगलदास, द्वारिका प्रसाद मिश्र, राम रुवरुप मिश्र, जईसन कवि अवधी भाषा मा कृष्ण काव्य लिखिन हय ।
मध्य युगमा रहीम तमाम काव्य केर किताब लिखिन हंए । अईसन ई बेताल पचीसी अवधी भाषा मा
लिखिन । दीन दयाल अवधी भाषा मा तमाम उपन्यास लिखिन, प्रियदास अउर केशवदास जइसन लोग टीका लिखिन, मुल्ल दाउद, प्रमेश्वरीलाल गुप्ता, डा. माताप्रसाद गुप्ता, मलिक मोहम्मद जाईसी लोग मोट मोट किताब लिखके अवधी भाषा आगे बढाईन । मलिक मोहम्मद जाईसी केरन के किताब पद्मावत आज भी लोक खुब पढ्त हय । महाकवि गोसांई गोश्वामी तुलसीदास जी रामचरित मानसय सिरिफ नाई लिखिन उ रामलाल नहछु, वरवै रामायाण, पर्वती मंगल, जानकी मंगल जईसन किताब लिखिन । कवि उस्मान, नूर मोहम्मद, कसिम शाह केर भी तमामन अवधी भाषा मा किताब हय । आधुनिक हिन्दी काव्य, अंगरेजीमा उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ, बिहार, अण्डमान निकोबार दीप समूह तक अवधी भाषा बोला जात हय । नेपाल मा भी ई भाषा बहुत जादा बोला जात हय । अवधी भाषा मा पद्य केर बहुतय विकास भवा पर गद्य केर विकास कम भवा देखा गवा हय । फिर भी फडिस, बंसीधर, रमईकाका (बहिरेबाबा), मृगेश, द्वारिकाप्रसाद मिश्र, त्रिलोचन शास्त्री, केदारनाथ अग्रवाल अउर अमिताब बच्चन कय बप्पा कवि स्वर्गिय हरिवंश राय बच्चन गद्य अउर पद्यमा तमाम रचना लिखिन हय । अईसन कवियनमा चर्तुभुज शर्मा, मस्तराम, क्षेम जी, मुंसी रहमान, बेकल उत्साही, आचार्य विश्वनाथ पाठक, पारसनाथ भ्रमर, काका वेस्वारी, आधा प्रसाद ‘उन्मत’, दिवाकरण अग्नीहोत्री, हरिशचन्द्र पाण्डे, शच्चिदानन्द, जगदीश पियुस, प्रलंयकारी, कमलनयन, कैशाल गौतम, बृजेन्द्र मिश्र, प्रताप नारायण मिश्र ‘पत्रकार’, ई कवि आल्हा जईसन ग्रन्थ लिखके अमर
हुईगए । महावीर प्रसाद द्विवेदी, डा. रामविलास शर्मा, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, त्रिलोचन जइसे कवि अवधी केर विकास के खातिर बहोतय मेहनत किहिन हय । अवधी भाषा केर विकास भवा हय । मूला भोजपुरी अउर मैथिली भाषा के तुलनामा कम भवा हय, हियां कुछ लोक प्रश्न उठए सकता हय कि अवधी भाषा केर विकास करत समय भारत के हिया“ काहे बात उठावा गवा हय । ई मा हमार बात ई हय की जब अवधी भाषा के विकास के बात करिब तो भारत कैंहा अनदेखा नाई किया जाय सकत हय । ई के मलतब ई हय की बिना भारत के अवधी भाषा कर कल्पना भी नाई किया जाय सकत हय। ई के कारण हय नेपाल अउर भारत कय बीच रोटी बेटी केर सम्बन्ध । हमार धर्म अउर संस्कृति, सभ्यता, वैदिक साहित्य अउर अवधी साहित्य एक हय । ई मारे अवधी भाषा केर विकास ई दुनौ देश सिरफ मिल के ई काम कर सकत हए । नेपाल मा स्थिति आज भी ई हय की नेपाल मा जत्ता मैथिली, भोजपुरी केर विकास हुआ हय अवधी केर बहोत कम विकास हुआ हय । गोरखाली क्षेत्र केर बांके जिलामा अवधी भाषा घर घर मा बोला जात हय । हियां नेपालगन्ज नगर मा रहिरहे पहाडी वर्ग के सिजापति वर्ग के लोक तो जादा से जादा अवधी भाषा मा बोलत हय । बांके जिला केर हिरमिनिया केर पहाडीनपुर्वा गा“व मा रहिरहे पहाडी वर्ग मा अवधी भाषा मा बोलय केर परम्परा आज तक हय । नेपालगन्ज नगर मा पहिले अवधी केर बहोत पकड रहा हियां रहे धोबी समुदाय के घर मा बिहा बरात केर (बाँकी कय पृष्ठ ६ मय) समय बिरहा जईसन गीत गावा जात रहा । बनिया केर समुदाय मा सोहर जईसा गाना गावा जात रहा । पर अब ई परम्परा धिरे धिरे हटत जात हय । आधुनिकरण के चलन के कारण ई के जगह हिन्दी, अंगरेजी, नेपाली भाषा मा लोग अब नाचय गावय लगे हय । पहिले हियां गुडिया अउर सनिनो जईसन पर्व मा आल्हा खण्ड घर घर मा गावा जात रहए । श्रीकृष्ण जन्मअष्टी, दुर्गा पूजा पर्व कय अवसरमा अवधी भाषा मा बिरहा, जबाबी किर्तन किहां जात हियां । फिर भी अभि हियां अवधी भाषा केर पकड बहोत हय । ई भाषा केर विकास कै खातिर हियां के महेन्द्र पुस्तकालय के प्रधान अउर अवधी भाषा केर कवि सच्चिदानन्द चौबे ‘सच्चिदानन्द’, जइसन लोग बहोत काम किहिन हय । चौबे जी अभितक अवधी रामायण, भगवान बुद्ध कय जीवन चरित्र के उपर आल्हा, हरितालिका ब्रत कथा ‘दोहा–चौपाई’, उलार उपान्यास केर अनुबाद, सत्यनारायण कथा ‘दोहा–चौपाई’, रामदुत हनुमान ‘सवईया छन्दमा’, सुन्दर काण्ड तुलसी दास केर संक्षिप्त जीवनी
(आल्हा छन्दमा), भौतारिणी गीता (संस्कृत के उल्था), गुरु बृहस्पति केर कथा (दोहा–चौपाई अउर छन्दमा), अइसनै भतृहरि नीति, वैराग्य श्रृंगार, शतक केर उल्था (दोहामा), दुर्गा सप्तसती (अवधी भाषा मा), उल्था दोहा अउर चौपाई छन्दमा, संक्षिप्त रामायण (सवैया छन्दमा), अवधी लोक गीत, अवधीमा कविता, अवधी कथा संग्रह, अवधी गजल संग्रह, भानु चरित्र, मोती चरित्र, लक्ष्मी चरित्र, तुलसी चरित्र, जइसन कवि केरन के संक्षिप्त काव्य परिचय लिखके अवधी भाषा के बहोत सेवा किहिन हय । ई अइसे देखा जाय तो हियां बांके जिला मा अवधी केर भविष्य बहुतए उज्जल हय । हियां अवधी भाषी तमाम पत्रकार भए पर अवधी भाषा मा एकऔं पत्रिका नाई निकाल पाईन हय । ई दुर्भाग्य केर बात होय । विगत मा एक – दुई पत्रिका अवधी भाषा मा निकालय केर प्रयास किया गवा पर अब ऊ पत्रिका बन्द हुइगए हय । अइसा नाई हय हियां अवधी भाषा केर विकास के खातिर अउर लोग भी लागे हय । नेपालगन्जमा स्वार्गिय लोकनाथ बर्मा ग्रामदीप साप्ताहिक पत्रिका निकार के बहुत चर्चित भए रहए । अबही बयोबृद्ध पत्रकार विष्णुलाल कुमाल जईसन लोग अवधी भाषा केर विकास कय खातिर दिन रात लगे हए अईसनय श्यामानन्द सिंह, बाबा सैøयद अली शाह, सुरज लाल वैश्य, मधई सिंह, नितेश विश्वकर्मा, अश्फाक जसगढ ‘संघर्ष ’, ईद्रीस सायल, भगवान दास, पुष्पा गुप्ता, चन्दा सिंह, अल्पना वैश्य, चन्दा पटहर, किरऊ मियां जईसन लोग आज तक बहोत काम करतय आए हय । धिरे धिरे काम हुइ रहा हय । पर अबहीं बहोतय काम करयक बांकी हय । अब काम तेजीस नबढावा गवा तो अवधी भाषी साहित्य मैथिली अउर भोजपुरी से बहुत पिछे रही जाई ।

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