प्रेम केर दुःख -आत्म समीक्षा)
शिव प्रसाद पाठक
हम बाबूराम यादव उमर ८५ साल यहीं रहय वाले होई । हमरे घर मइहाँ हमरे बहुरिया से भेंट मुलाकात करय एक बिटिया आवा करत रही एक दिन हमहूँ घरे पहुँचेन तौ वही बिटिया हमरे बहुरिया से बतुवात रही हमहूँ बैठ गएन परिचय भवा तौ मालूम भावा वह कै नाम कमला होय औ ऊ हमरे बहुरिया के नैहर केर परिचित होय । जव कमला से बातचीत करय लोगन तौ वहके बोलय केर तरीका जवाब देयक शैली औ तर्क के तरीका हमका नीक लाग मधुर भाषा आपनत्व मिला जवाब से हमार मन का जीत लिहिस चाय पानी मे बाल कमला चली गय मने वहकै ब्यक्तित्व हम का याद रहा । एक दिन अचानक कपडा के दुकान मइहाँ कमला से भेंट होय गवा नमस्कार अभिवादन के बाद कहय लाग आपके ब्यक्तित्व का हम भूल नाई पाए हन आप कै ब्यवहार बात करयक तरीका दुसरे कइहाँ सम्मान देयक उत्तम बिचार हम का बहुत अच्छा लाग है । आज तक हम जतने भी आदमी के साथ घण्टा आधा घण्टा बात बतकही किया है वह मा आप से पन्द्...









