
शिवराज साहु
नेपालगन्ज, २८ बैशाख – मातृ देवो भवः अर्थात अम्मा एवं माता सें उप्पर औं कोई देवी देवता नाई होत हैं ।
मातृ दिवस अर्थात अम्मा दिवस माता प्रति सम्मान करेक और माता कय याद करेयवाला दिन का अम्मा दिवस कय रुपमा मनावा जात हैं । यी दिवस विश्व कय लगभग सब देशन मइहा अपन अपन रितिरिवाज औ परम्परा सें मनावात हैं । हमार नेपालमा प्रत्येक बैशाख महिना कृष्ण पक्ष कय अधेंरियम् अर्थात कृष्ण औंसी कय दिन मातातीर्थ वा अम्मा दिवस मनावा जात है ।

नेपाल मईहा सनातनी हिन्दू संस्कृति अनुसार ई दिवस बैशाख कय कृष्ण पक्ष कय अंधेरियम अथार्त कृष्ण औंसी कें दिन माता वा अम्मा कय मुँह देखेक एवं मातातीर्थ आंैसी कय रुपमा मनाएक चलन है । इ दिन जन्म दिहेवाली अम्मा कें मुँह देखेक खातिर सन्तान अपन घर वा अम्मा रहेवाले जगह मइहा जाइकय अपन समर्थ अनुसार बढिंया–बढिंया खानपीन खावावेक औं साथैंम उपहार दैकें माता वा अम्मा कइहा प्रसन्न करत हैं और आर्शिवाद लेत हैं । जिकैं अम्मा वा माता जीवित हैं वह लोग मिष्ठान–मिष्ठान खाना कय परिकार बनाइक खवावत है, लत्ता–कपडा एवं अन्य उपहार दैंके अपन कृतज्ञता (अम्मा का धन्यबाद औं सम्मान) जाहिर करत हैं । औं जिकैं माता एवं अम्मा नाई हैं वह लोग अपन–अपन सामर्थ अनुसार दान–दक्षिणा सहित अम्मा कय मुक्ति कय कामना औं याद करकैं मनावत हैं ।
अइसेन अन्य देश कय बारेमा कहाँ जाय तो जैसें अमेरिका मइहा माता एवं अम्मा दिवस आधुनिक दिवस कय अवधारणा ग्राफटन वेस्ट भर्जिनिया मइहा एना जार्भिस द्वारा सम्पूर्ण अम्मा एवं माता लोग अर्थात मातृत्वका कय खातिर खास तौरमा पारिवारिक एवं उनलोगन कय आपसी सम्बन्ध का सम्मान दिहेंक खातिर आरम्भ वा शुरुवात किया गवा रहाय । आज कय दिन अम्मा दिवस अब लगभग संसार कें प्रत्येक कोना(कोना मइहा अलग(अलग दिनमा मनावा जात है । विदेशी श्रोत विकीपिडिया सें लिया गवा हैं ।
