
हमरे अवधि समाज मइहाँ ई श्री गणेश चतुर्थि (सकट पूजा) कय वडा महत्व हय । महतारी अपने लरिकन के लम्बी उमिर सुख सुस्वाथ केर कामना अपने मन मइहाँ धइकय व्रत रहत
हिंयैं । दिन भर पानी तक नाई पियत हिंयै । औ रात के चन्द्र दर्शन कै कय गणेश गौरी कै विधि से पूजा प्रार्थन करत हिंयै । माघ महिना के अंधेर पाख के चौथ के दिन ई पूजा होत हय । यी पूजा कय सामान अउर पूजा से अलगय होत हय । गन्जी औ कोहडा कइहाँ उबालत हय । तिल का धोय सुखवाय के भूजत हय अउर उमा भेली मिठाई मिलावत हय । कोई कोई तौ वही तिल कै भेली के चासनी मइहाँ लेड्डू बनावत हय । खाली तिल के नाई फूलमाला भूजके ऊ कय भी लड्डू बनत हय । जिके घर मइहाँ लरिका जन्म लिहे रहत हय उनके घर मइहाँ छागड बनावत
हय ।
पूजा के दिन कय तैयारी वडा कठिन होत हय, पूरै घर दुवार अंगना कय सफाई कै कय लीप पोत करत
हय । फिर व्रत रहँय वाली मिहरुवैं नहात हय अउर बार धोयके सफा धोवा कपडा पहिरत हिंयैं । तब चूल्हा बारत हिंयैं वही चूल्हा परिहा तिल, पूmलमाला भूजत हय लड्रडू बनावत हय औ जउन बर्तन मइहाँ चासनी बनाये रहत हय वही बर्तन मइहाँ कोहडा औ गन्जी उसेवत हय । यी सव भगवान कइहाँ भोग लगावै वाला सामान बहुत वडी पवित्रता, शुद्धता से तैयार कीन करत हय ।
अव संझा के अपन साज सिंगार कै कय पूजा करय वाली मिहरुवै पूजा मइहाँ बैठत हिंयैं । रोटी बेलय वाला चौकी परिहा गणेश भगवान कय चित्र बनावत हय । वही चौकी परिहा पूजा वाली सुपारी (डली ) धरत हय औ चारिऊ ओर भेली केर सुपारी तना बनाय बनाय के धरत हय गाय के गोबर कै गउर बनायके धरत हय । अव पूजा शुरु होत हय । चन्द्रमा कय दर्शन कै कय गणेश गौरी कलश कय पूजा मइहाँ स्नान चन्दन सेंदूर फूल से वडे मन से पूजा होत है । धूप अगरबत्ती कपूर से आरती करत हय । जब तउन तिल कय लेड्डू तिल गन्जी कोंहडा फुलमाला कय लेडडू बना रहत हय । वही केर भोग गणेश गौरी कइहाँ लगावा जात हय । अव अगियार करत हय । बढिया कण्डी के आँग मइहाँ तिल भेली घियू सव मिलायके सकट महराज के नाउ से अगियार कीन जात हय । मिहरुवैं सव पुराने जमाने कय सकट मइहाँ घटा घटना केर किस्सा कहानी कहिकय सकट महराज अच्छत छोड के पाँव पकरत हिंयैं । पूजा के बाद मइहाँ अपने लरिकेन के माँथे परिहा गणेश गौरी कइहाँ चढावा गा सेंदूर से चन्दन करत हय औ अपने घरके वडे पुरनियँन केर पाँव पकरै केर चलन हय ।
सकट पूजा कै वडा महत्व हय इमा जउन हय परसाद बनत हय वही परसाद से भगवान कै आर्शिवाद मिलतय हय । तिल भेली घिउ यी सामान से जाडे के महिना मइहाँ शरीर कइहाँ अउर ताकत (शक्ति) मिलत हय शरीर कइहाँ स्वस्थ राखय वाला सव सामान कै परसाद बने से जउन जाडे से शरीर कै शक्ति कम होय जात हय ऊ का पूरा कै देत हय । सकट पूजा से समाज मइहाँअपनत्व कय भावना बढत है । सकट पूजा कय परसाद एक दोसरेक घरे पहँचाये से एक आपस मइहाँ प्रेम प्यार बडत हय । एक दोसरे केर सहयोग केर भावना बढत हय । ई सव त्योहार एकता प्यार औ भाईचारा कय भावना बनावयम जोर देत हय यही यी त्योहार कै महत्व हय ।
(नेपालगन्ज उपमहानगरपालिका वार्ड नं.–६ फुल्टेक्रा, बाँके) (स्रो.समाज जागरण साप्ताकिक)


