
२०७७ चैत ११ गते
बाल विवाह होयक कारन एक तौ शिक्षा कय कमी का मुख्य रुप मईहाँ माना जाय सकत हय । बालबालिकन
(लरिकेन बिटियन) कैंहा ज्ञान औ वातावरण कय कमी के कारन से बाल विवाह होत रहेक अवस्था हय । वही से विद्यालय तह मईहाँ बाल विवाह के बिषय मईहाँ शिक्षा देयक एकदम जरुरी हय औ देयह चाही । आज के छोट छोट लरिके बिटियन का जान लेयक चाही काल कय कै कर्णधार होय । ईन लोगन कईहाँ कस कय बनवा जाय ई बातन मईहाँ शिक्षा मईहाँ आशा रहत हय । उन लोग कस शिक्षा पाइन, अपने व्यवहार वइस बनावत हय । बालबालिका विद्यालय मईहाँ ज्ञान सीप सिखैक खातिर जात हय ।
उन लोग शिक्षक जउन कहियै ऊ बात ईनकार न करिहय । लरिका बिटिय विद्यालय मईहाँ साथी भाईन के संघे खेलत रहत हय । उन लोगन कईहाँ विवाह के मतलब का होय ऊ कय बारेम कुछ पता नाय रहत हय मने तब्भौ उन लोग बाल विवाह करत रहत हय । बैबाहिक संस्कार नाय समझ पावत हय, तब्भौ उन लोग बाल विवाह करत रहेक अवस्था हय । औं ईके बाद मईहाँ ई कय कस असर परी ई सब बातन कय तौ उन लोगन कईहाँ तनिकौ ज्ञान नाय रहत हय । हूसै खेलयक अउर पढयक लिखयक खातिर विद्यालय जायक उमेर मईहाँ विवाह होयक बाद तौ उन लोगन कय तौ भविष्य कस होई, ई सबचीज परिहा एकदम गम्भीर बिषय बना हय ।
बाँके जिल्ला मईहाँ कहूँ तौ बाल विवाह के बिषय मईहाँ जनचेतनामूलक कार्यक्रम औ गोष्ठी सम्पन्न करेप भी बाल विवाह के शिर्षक मईहाँ पढाई नाय होत हय । बाल विवाह कय थोरा चर्चा हायेक बाद बालबालिकन कईहाँ बाल विवाह करब ठीक नाय होत हय, कहिकै अपनै कहि सकैं जस मे कय शैक्षिक अभ्यास हम लोगन थिर नाई हय ।
ई अभ्यास कय आवश्यकता दिहेक अवस्था मईहाँ सब विद्यालय बाल विवाह के बिषम मईहाँ कस कय बालबालिकन कईहाँ सचेत करावा जाय अउर विद्यालय मईहाँ विद्यार्थीन कय संख्या बढावैक जस बातन परिहा ध्यान दियेक कहिकै सोचकय परत हय । पाठ्यक्रम मईहाँ बाल विवाह सम्बन्धि कहू बात चीत भवा तौ जादा अर्थ मईहाँ प्रष्ट नाई
हय । शिक्षक पढावत दफी मईहाँ पूूछौं बाल विवाह के मतलब का होय तौ ऊ ब्यवहारिक बनि नाय सकत हय । ई मेर कय न करौ, कहौं तौ भी बालबालिका लोग बाल बिवाह करैक तयार होत हय । विवाह करे से का होत हय अउर ई के बारेम साेंच बालबालिका मईहाँ होत हय ।
लरिका बिटिय एस.एल.सी पास नाय होत हय औ बैवाहिक जीवन मईहाँ परिणत होई जात हय । ई से का होत हय उन लोगन कय शैक्षिक भविष्य खाली अन्धकार नाय होत हय, सामाजिक, आर्थिक औ स्वास्थ्य मईहाँ गम्भीर असर देखात हय । अउर गांव घर समाज मईहाँ जावा जाय तौ बाल विवाह के कारन बहुतन का तौ पचतायक परा हय, ई आज भी मिलत हय । मने ऊ लोग पहिले तनिकौ नाय सोंचत हय बाद मईहाँ पचतायें से का भवा । उन लोगन कईहाँ सही समय मईहाँ सही शिक्षा दय देव तौ ई मेर कय काहे होय ।
आज ई मेर कय अवस्था ना
आवै । घर परिवार से भी लरिका बिटिय शिक्षक शिक्षिका कहत हय तौ उन लोगन परिहा हालिन बिश्वास करत हय । शिक्षक जउन कहत हय ऊ कय बात सही होत हय । मानसिकता प्राय विद्यार्थीन मईहाँ होत हय । वईसे उन लोगन कईहाँ विद्यालय मईहाँ अच्छा से शिक्षा दय सकौ तौ बाल विवाह मईहाँ कमी होय सकत हय । बालविवाह न्युनीकरण के खातिर बाँके जिल्ला मईहाँ तमामन कार्यक्रम भयें हय । कुछ विद्यालय मईहाँ बाल क्लब गठन भयें हय । मने ऊ बाल क्लब मईहाँ सहभागी लोग बालविवाह करत रहत हय । हिंयौं शिक्षा के अभाव मईहाँ बाल विवाह प्रशय पाइस सै । शिक्षा उन लोगन कईहाँ दियेक तौ तमामन माध्यम से दैय सका जात हय । मने विद्यालय मईहाँ दिया गवा शिक्षा जउन हय तनि सैंगर प्रभावकारी होत हय । ई बिषय मईहाँ सभय सरोकारवाले लोगन कय ध्यान जरुर से जरुर जायक जरुरी हय ।
नेपालगन्ज उपमहानगरपालिका वडा नं.–५, बा“के
(स्रोतः समाज जागरण साप्ताहिक)

