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पिछडा वर्ग कब तक पिछडय रही ?

२०७७ चैत्र ११ गते

नेपाल मईहाँ २ मेर के मनई रहत हय । ई मा एक जात हय पहाडी वर्ग केर दोसर हय मधेशी वर्ग केर । ई मा देखव तो पावा जात हय कि पहाडी वर्ग बहुतय शिक्षित अऊर धनी हय मूला मधेशी जातिमा न तव शिक्षा हय न तव ऊ धनीन हय । मधेशीन मईहाँ एक वर्ग हय ऊ का पिछडा जात कहा जात हय । ई जाति का आगे बढावेक खातिर उनका ओवीसी कय श्रेणी मा सुचीकृत कर दिहा गवा हय । ई पिछडा वर्गमा हय कुशवाहा, कुर्मी, कुम्हार, कंहार, कमार, केवट, कानु, तेली, कलवार, नुनिया, बनिया, भेडिहर, माली, मल्लाह, मुसलमान, वरैड, यादव, राजभर, राजधौव, रौनियार, लोहार, लोध, सुडी, सैनी, सोनार, हलुवाई, हमाज, अयात, केवरत, वर्णवाल, जोगिया, बिन, बेलदार, बोट, अऊर ईनका बडै जईसन जात केर आगे बढावेक ई ओबीसी काम करत आवा हय । ई जातन केरि विकास करेक खातिर ओबीसी सरकार के आगे आपन मांग उठावत हय । मूला सरकारी स्तर मा जऊन सहयोग आवत हय उत्ता रकम से पिछडा वर्ग केरे विकास नाय होई पाईस हय । पिछडा जाति के विकास मईहाँ बाधक शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास अऊर रोजगार हय । ई काम सरकार करेक नाय चाहत हय । मुंह बन्द करेक खातिर थोर रकम निकासा करत हय भी तो ऊ का पिछडा वर्ग के उत्थान काम करय लाग ही खाए पचाए लेत हय । पिछडा वर्ग केर विकास के खातिर पिछडा वर्ग महासंघ दशकन से मांग उठावत आवा हय । २०६४/२/२ गते मा राष्ट्रिय जनता दल नेपाल (लालटेन) अऊर तत्कालीन स्थानीय मंत्री अऊर सचिव समुलन केरे संघ के समझदारी मा वार्ता भवा रहय । ई मा प्रतिष्ठान केरे ठऊर मा विकास समिति गठन करेक आश्वासन मिला रहय ।

आ.व. २०६४/०६५ मईहा मधेशी पिछडा वर्ग अऊर मुस्लिम उत्थान कार्यक्रम अन्तर्गत २ करोड ५० लाख रुपिया खरच किहा गवा रहय । अईसेनय आ.व. ०६५/०६६ मईहाँ ३ करोड ७५ लाख रु. बजेट भी कायम किहा गवा । ई मा मधेश केरे २० जिला मईहाँ ई विकास करैक कार्यक्रम चलावा गवा । ई के बाद मईहाँ तमाम विकास केरे कार्यक्रम आवा मूला थोर बजेट आवेक कारण ई कार्यक्रम उपयोगी नाय बन पाईस ।
महासंघ केरे मुख्य मांग सरकारी स्तरमा पिछडा वर्ग ओबीसी प्रतिष्ठान केर स्थापना करेक हय । मूला सरकार तमाम बहाना बनायक ई मांगन का पाछे करतय आवा हय । जबकि पिछडा वर्ग ओबीसी उत्थान विकास समिति गठन केरे आदेश का टारत आवा हय । हिया एक बात समझेक जरुरी हय कि पिछडा वर्ग ओबीसी उत्थान विकास समिति गठन आदेश मिति २०६५÷९÷२ गते पारित किहा गवा रहय । ०६५ चईत ८, ९ अऊर १० गते मधेश बन्द केरे समयमा चईत ११ गते सरकारी वार्ता टोली अऊर नेपाल पिछडा वर्ग ओबीसी महासंघ बीच मईहाँ वार्ता टोली केर बीच वार्ता भवा अऊर ५ बूँदा मईहाँ समझौता करिके गठित सिफारिस कमिटी आपन सिफारिस देय दिहिस ।
ई मा सरकार पिछडा वर्ग ओबीसी विकास समिति खडा करेक नाय चाहत हय अऊर प्रक्रिया कय नाम पर छलकपट करतय आवा हय । अऊर ई मा सरकार ई बात पर राजी हय तो ई के निर्णय तुरुन्तै काहे नाय खडा करत हय ?
नेपाल पिछडा वर्ग ओबीसी अबही तक जऊन काम किहिस हय ऊ मा थोर उपलब्धी जरुर मिला हय मूला ई काम से पिछडा वर्ग असन्तुष्ट हय । ७७ जिल्ला केरे सव गा.वि.स. मईहाँ बजेट व्यवस्था एक आदमी गाविस परिषद केर प्रतिनिधि होय केर व्यवस्था अईसेन मा करीबै करीब २० जिल्ला मईहाँ
रहा । जिमा जिसस केरे माध्यम से विकास काम होई रहा हय । यहय कार्यक्रम अन्तर्गत भगही, भोजपुरी, अवधी भाषा अऊर संस्कृति संरक्षण केर काम होई रहा हय । मगही भाषा मा सरकारी संचार माध्यममा समाचार छापेक, प्रशारण करेक समझदारी भवा हय । कक्षा १ से लईके कक्षा ८ तक का १० वरस के खातिर रु. ५००।– छात्रवृति देए केरे व्यवस्था २०६५/८/२१ मईहाँ भवा । ई बात अन्नपूर्णा पोष्टमा प्रकाशित विगत समय मा भवा रहय । आ.व. २०६५/०६६ केरे वार्षिक कार्यक्रम (लाल किताब) केरे पेज नं. २५४ मा पिछडा वर्ग के २५ ठव के नाम उल्लेख किहा गवा हय । ओबीसी महासंघ पिछडा हुआ वर्ग केरे खातिर मूल ई मांग रक्खत आवा हय । ई मांग हय पिछडा वर्ग ओबीसी आरक्षण लागु होयक चाही । ३ प्रतिशत ब्याज मा कृषि ऋण, पशु विकास बैंक, कृषि क्षेत्र, आरक्षण अऊर हरवाहा–चरवाहा, स्कुल केरे व्यवस्था होयक चाही, नवा जनगणना करिकय पिछडा वर्ग ओबीसी का ३३ प्रतिशत शैक्षिक संस्था सहित राज्य केरे सभन अंग मा जनसंख्या केरे आधार मईहाँ आरक्षण के व्यवस्था होएक चाही, हुलाकी मार्गका मधेशी राजमार्ग केरे रुप मईहाँ विकास होएक चाही, स्वायत्त मधेश एक प्रदेश कायम होएक चाही, पिछडा वर्ग ओबीसी केरे सुवही प्रतिवेदन तुरुन्तय लागू किहा जाय, मगही भाषा केरे प्राथमिक शिक्षा मईहाँ समावेश करेक चाही, साथेन मईहाँ संचार माध्यम से मगही भाषा मा तुरुन्तय समाचार प्रशारण होएक चाहि । तुरन्तै ०६६÷०६७ मा पिछडा वर्ग केरे एक मेहरारु अऊर एक मरद केरे साथ २ आदमी का सभय गाउँपालिका, नगर, उपमहानगर, महानगरपालिका अऊर जिसस मईहाँ प्रतिनिधि होएक चाहि, मधेश केरे सीमा सुरक्षा, पिछडा वर्ग ओबीसी महासंघ के लोगय करैय, मधेश केरे सीमा सुरक्षा मईहाँ आतंक बन्द करेक अऊर नागरिकता समस्या समाधान होय । पिछडा ३३ ठव जात केरे समस्या बहुतय हय । संविधान मईहाँ ईन के अऊर भाषा केरे उल्लेख नभवा तव आगे आवय वालेन समय मईहाँ ई जातन केरे भुटान केरे शरणार्थी जईसन समस्या पईदा होई सकत हय । महासंघ केरे मांग बहुतय हय मूला सरकार ई मा अबही तक थोरव मांग पुरा नाय किहिस हय । हुलाकी राजमार्ग का मधेशी राजमार्ग केरे नाम मा नामाकरण नाय किहिस हय । ईमेर से पिछडा वर्गन मा बहुतय रोष हय ।


जब तक संविधान मईहाँ संधोशन नाय होत हय तब तक पिछडा वर्गन केरे समस्या भी दूर नहोईहय अईस लागत हय । मधेशी दल संविधान संशोधन केरे मांग उठावत आवा हय मूला मधेसिन पाटी सत्ता अऊर कुर्सी केरे लोभ मईहाँ परिके हमेशा एक आपसय मईहाँ लडत आए हय । ई मारे फुट के कारन उन के मांग पुरा नाय होई पाईस हय ।
मधेशी नेता चुनाव तव हियाँ मधेस से जितत हय मूला जब सत्ता मईहाँ पहुच जात हय । पहाडी वर्ग केरे हित मा काम करय लागत हय । ई मारे मधेशी दल मधेशी जनता के आँखी से निचे गिरि गए हय । मधेशी जनतय अब मधेसिन पार्टी पर विश्वास नाय करत हय । कुछय मधेशी दल के नेता हय जऊन कि मुस्लिम जाति से हय मूला ऊ मुस्लिम नेता मुस्लिम समुदाय कय हित मईहाँ कउनौ काम नाय किहिन हय ऊ ई लोग सभन मुस्लिम का आगे बढावेक काम नाय किहिन सिरिफ अपने जात का आगे बढावेक काम किहिन हय । ई मारे मुस्लिम समुदाय वईस मुस्लिम मधेशी नेता से गुस्साए बईठे हय । ई मारे आगे संसदीय चुनाव होई हय तो मुस्लिम समुदाय वईसेन मुस्लिम मधेशी नेता से खुदय निपट लेहंय । मधेसिन केरे ३५ ठव जात का बराबर केरि हक अधिकार दिलावय केरे खातिर अईसेन मधेसिन नेता लोग कबहुँ आवाज नाय उठाईन हय । ३५ ठव जात के बराबर केरि हक अधिकार, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, शैक्षिक केरे समस्या हय । यहय कारन से मधेशी मा लाखौं लाख केरि संख्या मईहाँ रहय वाले मधेशी आपन हक अधिकार से बंचित हय । मधेशवादी दल के लोग उनके खातिर कबहुँ आवाज नाय उठाईन हय ।
मधेश केरे आन्दोलन मईहाँ कतनव मधेशी जनता का शहीद बनावा गवा । कतनव मधेशी योद्धा आन्दोलन मईहाँ घायल हुईकय आपन हात, पांव कटाए के लुला ल·डा हुई गए उन के कुर्बानी मधेशी दल आज भूली गए हय । ई मारे अब मधेशी जनता ओबीसी मा पडय वाले जात जाति के लोग मधेश आन्दोलन से कुछ पाठ सिखेक जरुरी हय । ई मा आज समझय के जरुरी हय कि हमार आपन केरि हक अधिकार कऊन राजनीतिक दल सुरक्षित कराय सकत हय । मधेशी दल ई काम पुरा नाय कराय सकत हय तो अब मधेशी दलका हमेशा के खातिर त्याग देयक जरुरी हुई गवा हय ।
(स्रोतः समाज जागरण साप्ताहिक)

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