
(माघ १२, सोमबार)
अधिकार औ कर्तब्य कय तरजुवा पय समान रुप से तुलय के बादिन मानव जीवन सफल औ सार्थक होत हय, अक्सर यी देखा गवा हय कि व्यक्ति आपन अधिकार कय प्रति तो सजग रहत
हय । जब कि कर्तव्यन कै प्रति उदासीन रहत है । कइयों दफा तो आदमी सब कुछ जानत – सुनत भए अञ्जान बनि जात है । वह शायद यी नाहीं जानत कि अधिकार औ कर्तव्य कै सन्तुलनै व्यक्ति औ राष्टू दुनहुन कै प्रगति औ सुरक्षा कै मूलभूत आधार होत है । लोकतान्त्रिक संविधान औ धारणा वाले देशन के खातिर यह सन्तुलन अत्यन्तै जरुरी हय ।
हमार देश नेपाल अबहिन नवा– नवा लोकतान्त्रिक देश भवा है जहाँ अब जनता कै राज्य होई । शासन कय बागडोर नागरिक कय द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियन कै हांथ मईहाँ रही । अतः देश कय वास्तविक समृद्धि देश कय नागरिक कय अधिकार औ कर्तव्यन कय समुचित निर्वाह कय ऊपर निर्भर करति हय, हमरे विकासोन्मुख देश कईहाँ आजु ऐसेन व्यक्तिन कय आवश्यकता हय, जो हर प्रकार ते जागरुक औ कर्तव्य परायण देश कय आर्दश नागरिक होंय ।
यूू तो कौनव शहर या नगर –गाूवमा रहय वाले आदमिन का नागरिक कहा जाय सकत हय । मने यी शब्द अब बिशेष अर्थमा रुढ औ परिभाषिक होइ चुका हय, यहिका रुढ औ परिभाषिक अर्थ यी होयः– कौनव देश बिशेष या राज्य के अधिकारन कईहाँ उपभोग करै वाला व्यक्ति । आर्दश नागरिक वह होत हय जो अधिकारन के साथेन साथ कर्तव्यनौ का समुचित पालन करत हय वस्तुतः पहिले कर्तव्य होयका चाही तव पाछे अधिकार । प्रत्येक नागरिक राष्ट्र कै द्वारा प्रदत्त अनगिनता वरदानन का लाभ उठावत है जेहिके बदले राष्ट्र कय प्रति वहू कय कुछ कर्तव्य होत हय । जिनका हर एक सुवुद्ध नागरिक पालना करई का चाही । यहै नागरिका कय मुख्य लक्ष्य औ राष्ट्रिय जीवन कय सार्थकता होय ।
अधिकार कर्तव्यन कय पालना के खातिर व्यक्तिमा कुछ गुण अपेक्षित होत हय । सबसे पहिले वहिका, मानसिक औ वौद्धिक बिकास कम ते कम एतना अवश्य होयका चाही कि वह सामाजिक परिस्थितयन का समझिकय वहिके अनुसार कामु कइ सकय । वहिका स्वास्थ्य सामान्य होय, पर्याप्त वह कय शिक्षा होय, वहिका व्योहार सामाजिक गुणन ते परिपूर्ण होय तथा वहि कय प्रवृत्ति सद्गुणन की ओरिया उन्मुख होय, दुव्र्यसनी औ नशेडी व्यक्ति खुद अपनै व्यक्तित्व का नांहि संमारिह पावत तो वह दुसरेन कय उत्तरदायित्व कैसे निभाय पाई ? प्रत्येक देश कय नागरिक का आत्मनिर्भर औ समर्थ होय का चाही विशेष कइ कय शारीरिक, बँैद्धिक औ आर्थिकदृष्टि से वहिका स्वावलम्बी होब अनिवार्य है । स्वावलम्बन कय साथे साथ गर संयमित होय तो फिर कहना का सोनामा सुहागा वाली कहाावत वहिके ऊपर चरित्रार्थ होत है । स्वालम्बी संयमी व्यक्तियै अच्छा नागरिक बनिकै राष्ट्रिय बिकारमा सहायक होइ सकत हय ।
प्रत्येक नागरिक कय कर्तव्य होय कि वह आपन गांव, नगर, राज्यर देश औ बिदेशमा दिन प्रतिदिन घटय वाली घटनन कय प्रति जागरुक रहय । अपने चारो ओरिया आर्थिक औ सामाजिक परिर्वतन औ जन आन्दोलनन कय परिचय पावै के बादिन व्यक्ति भली भाूति सोचि सकत हय कि वहिका यी बखत कर्तव्य का हय ? कत्र्तव्य हमेशा एकै जस नांही रहत, जैसी जरुरत आय परित हय कर्तव्य कय स्वरुप मईहाँ वैसन बदलाव आय जात हय । अतः एक अच्छा नागरिकमा व्यवहारिक स्तर कय लचीलापन होब अनिवार्य हय तबै वह समय औ स्थिति कय सांचामा अपने का ढालि कय अपने साथै साथ आपन राज्य औ राष्ट्र कय प्रगतिमा सहभागी बनिकै सद्नागरिक कर्तव्य कय परिचय दइ सकत हय ।
प्रत्येक नागरिक का मिलनसार, औ परोपकारी स्वभाव का होय का चाही, यई गुणन से सम्पन्न होइकय मानव समाज कय काम आय सकत है संसारमा कोउ अंकेल नांही रहि सकत है । यहीतना एकु दुसरे कै मदतै ते समाज कय सुधार होत हय ।
यहिका सहयोग कहा जात हय यहै व्यक्ति औ समाज कय उन्नति कय मूल मंत्र होय । प्रत्येक नागरिक कय प्रमुख तीन कर्तव्य होत हय आपन परिवार कय प्रति कर्तव्य आपन पडोसिन कय प्रति कर्तव्य औ समूचे देश कय प्रति कर्तव्य । यी कर्तव्यन का निभावय खत्तिर उद्धार दृष्टिकोण कय आवश्यकता होत हय सब तरह के मनइन से जहिकय निभि जात हय पर बुरे मनइन से जो निभाय लेय वहिका जानौं सही नागरिक हय । एैसन नागरिक कईहाँ आर्दश पुत्र, आर्दश पिता, आर्दश भाई आर्दश पति औ आर्दश पत्नी, आर्दश मित्र एवं आर्दश सहयोगी औ साथी होय का चाही । मित्रन मईहाँ वह आर्दश मित्र औ सभामा एक आर्दश सदस्य होय वह आर्दश नेता या आर्दश व्यक्तिन कय अनुयायी होय ।
नागरिक कय मुख्य अधिकार व्यक्तिगत स्वतन्त्रता होति हय । प्रत्येक नागरिक अपनी उचित मानवीय ईच्छन का पूर्ण करै के बरे स्वतन्त्र होत हय मने यहिके साथेन एकु शर्त होति हय कि ऊके कारन दुसरेन कय स्वतन्त्रता औ कार्ययनमा विध्न ना परै । यह तवही सम्भव होइ सकत हय जब प्रत्येक नागरिक दुसरेन कै भावना आदर
करैं । पडोसिन मा परस्पर प्रेम समबन्ध औ सहयोग कै भावना हो का चाही । दुसरेन कय हित के खत्तिर अपने स्वार्थन कै बलिदान देय के खत्तिर तयार रहय का चाही । बिपत्ति के समय दुखियन कय सहायता करब नागरिकता औ सहज मानवतौ कय एक गुण होय ।
नागरिकता कय चरम उत्कर्ष देश भक्तिमा देखाय परत हय, एक अच्छे नागरिक का देश कय संबिधान मा आस्था एवं सरकार कय द्वारा बनाएगे कानून मईहाँ विश्वास होयका चाही आवश्यकता परेमा देश के खत्तिर आपन–तन, मन, धन सम्पूर्ण करय के खत्तिर प्रस्तुत रहय का चाही । देश कय सम्मान कय खत्तिर ऐसेन काम करय का चाही जउने से देश कय सम्मान औ गौरव बढय ।
एक जागरुक नागरिक का आपन मताधिकार का लोभ–लालच या दबाव मा परिकय दूरुपयोग ना कर्रै का
चाही । निर्वाचन मा ऐसे व्यक्ति का मत देयका चाही जो निःस्वार्थ एवं देश कै प्रति हितैषी होय । भ्रष्टाचार एवं रिश्वत खोरी कय विरुद्ध होय । जहां आपन गांव, नगर, राज्य एवं राष्ट्र कय स्वाच्छता, देश कय स्वास्थ्य, जनता कय शिक्षा, रोथिन कय चिकित्सा कय प्रति हमार कर्तव्य हय, हुवैं सब प्रकार कय बुराइयां, विषमता, भ्रष्टाचार औ अन्याय कय विरुद्ध कदम उठावै का हमर कतर््व्य हय । जो लोग देश कय सुरक्षा कय प्रति खतरा पहुंचावै वाले जानकारी मईहाँ आवैं, ऐसे लोगन का सामाजिक, आर्थिक एवं न्यायिक के साथैन मानसिक दण्ड दिलावय के प्रति एह अच्छे नागरि का सजग रहय का चाही ।
यहि प्रकार से आपन कर्तव्यन कय पालन करत भए जेष्ठ नमगरिक आपन राज्य मईहाँ सुरक्षा, न्याय, शिक्षा, निर्वाद बिचार स्वातन्त्रय, व्यापार आदि के अधिकारन का उपयोग कइ सकत हय । यी प्रकार के व्यक्तिन से समाज का औ समाज से व्यक्ति का लाभ पहुंचि सकत हय । कर्तवय पालन कय बिना कौनिव प्रकार कय अधिकारन कय मांग करब स्वार्थ अउर अमानवता कहा जाई । ऐसे व्यक्ति नागरिक कहावै के अधिकारी नांही होत, ऐसे अधिकारन से ऊइ स्वयं बंचित होइ जात हयं । अतः फल कय चिन्ता छोडिकय देश– समाज कय सेवा मा निःस्वार्थ भाव से कर्म करौ– यहै हमार सुझाव रहा हय ।
(अध्यक्ष–अवधी सा“स्कृतिक बिकास परिषद् बा“के, नेपालगन्ज)

