Tuesday, April 21सत्यम खबर
Shadow

परवाना बना डाला

गजल


तिरी गजलों की चाहत ने तो दीवाना बना डाला,
जलाकर आग मेरे दिल को परवाना बना डाला ।

कभी लिखती हूँ मां पर तो कभी लिखती पिता पर हूँ,
कभी महबूब की चाहत में अफसाना बना डाला ।।

मिलाती हूँ नजर उससे नशा– सा होने लगता है,
नजर को उसने जैसे अपनी पैमाना बना डाला ।

वो कहता रोज मुझसे है तिरी आँखें नशीली हैं,
मिरी आँखों को उसने हाय मयखाना बना डाला ।।

छतो पर झूम के गाने लगी हूँ प्यार के नगमे,
निगोडी रिमझिमों ने मुझको मस्ताना बना डाला ।

ये कैसा आ गया है वक्त मतलब के हुए रिश्ते,
खदी को खुद से इंसां ने यूकक अनजाना बना डाला ।।

सनम से काश कह दे ‘राज’ कोई बात इतनी सी,
जुदाई ने हमारे घर को वीराना बना डाला ।।

ग्राम÷ पोस्ट– राजपुरा (सिसाय)
जिला – हिसार –125049
Mob.N.: 8569853471/8708043431
Email: [email protected]

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